Saturday, 8 October 2016

विकास और योगदान

आज यहॉ ,कल वहॉ ,परसो न जाने कहॉ
शहर का विकास हो रहा
सडके ,पुल और गगनचुंबी ईमारते बन रही
मजदूर डेरा डाल पडे हैं
दिन- रात काम ,निर्माण की आवाज
छोटी - छोटी प्लास्टिक और पतरे की झोपडी डाल पडे
यही बच्चे जन्म ले रहे ,पल रहे ,बढ रहे
वर्षों इसी तरह गुजरना
वीरान और साधनहीन जगहों पर गगनचुंबी अट्टालिकाएं
चमचमाती सडक ,रफ्तार से भागते पुल
पर जिनका पसीना बहा है अब उनकी जरूरत नहीं
यहॉ अमीरों का बसेरा है
गरीब हिकारत से देखा जा रहा है
उनको भगाया जा रहा है
किसी को याद भी नहीं
इन्हीं का खून - पसीना बहा है इसे बनाने में
इन्होंने अपनी जवानी इसी में गुजार दी
पत्थरों और सीमेंट को जोडते - जोडते
विकास के मार्ग बनाते - बनाते ये पीछे छूट गए
लोग भूल गए कि अमीर रह रहे हैं वह इन्हीं गरिबों और मजदूरों ने बनाया है
विकास हुआ पर पसीना इनका बहा
हर विकास के पीछे बहुतों का योगदान होता है

Tuesday, 4 October 2016

विश्व पशु दिवस World animal day

आज पूरे विश्व में पशु दिवस मनाया जाता है
पशुओं के अधिकारों के प्रति सजग किया जाता है
हिंदू घर्म में पशुओं और दूसरे जीव- जंतुओं का सम्मान करने की प्रथा प्रचीन काल से चली आ रही है
विष्णु का कच्छप और मतस्य अवतार
शिवजी का नंदी
मॉ दुर्गा की सवारी शेर
इसके अलावा गरूड ,मोर ,नाग ,हंस ,मूषक ऐसे न जाने कितने जीव हमारे ईश्वर से जुडे हुए हैं
लक्षमी जी का वाहन उल्लू और शिव के गले की शोभा बढाने वाले  सॉप की भी पूजा करते हैं
कौए को तो पितृ पक्ष में सुस्वाद भोजन दिया ही जाता है
कुत्ते को तो रोटी दी ही जाती है
बिल्ली को नहीं मारना है नहीं तो नरक का भागी बनेगे
गाय माता तो पूजनीय है ही
चौतीस करोड देवी- देवताओं का वास है उनमें
हाथी को तो शुभ ही माना जाता है और ऐश्वर्य का प्रतीक है
अश्व को तो जीवन से ही जोड दिया गया था
यहॉ तक कि गर्दभ को भी सम्मान दिया गया था
हर जीव को जीने का हक है
वह उसे मिलना ही चाहिए
आज मनुष्य जंगल काट रहा है.
उनको बेघर कर रहा है
विज्ञान के कारण पशुओं की जगह मशीनरी ने ले ली है
पहले हर घर में गाय- बैल ,बकरी ,मुर्गा ,कुत्ता और बिल्ली का डेरा तो रहता ही था
वह भी घर के सदस्य की तरह ही थे
उनके लिए भी रोटी में भागीदारी होती थी
शहरीकरण के कारण भी इनका महत्व कम हो रहा है
आज गौरयॉ की ची- ची नहीं सुनाई पड रही
हमको यह सोचने की जरुरत है कि अगर ये प्राणी न रहे तो जीवन कितना नीरस हो जाएगा
पशु केवल कहानियों में ही रह जाएगे

Saturday, 1 October 2016

जरा याद करो कुरबानी- सेना के जवानों को पैसों से न आका जाय

कब क्या बोलना है और क्यों बोलना है
बहुत संभलकर और सोचकर बोलना है
आज सेना के जवान मारे जा रहे हैं
उनकी बनिस्पत ही हम आजादी की सॉस ले रहे हैं
हमारे बच्चे उन्नति कर रहे हैं
आगे बढ रहे हैं ,फल- फूल रहे हैं
उनके योगदान को हम नगण्य मान ले
कल किसी ने कहा और इसके पहले भी सुना था
"अरे !सेना में कौन जाते हैं ,गरीब घरों के और गॉव के कम पढे- लिखे लोग जाते हैं
कौन अपने बच्चों को सेना में भेजेगा
मैं ,तुम या आप"
मरने के लिए और बाद में सम्मान "
शायद सही भी है
पर अगर सब यही सोचने लगे तो कोई नहीं सेना में जाएगा
और हम - आप अमन से नहीं बैठ सकते
और यह गलतफहमी भी नहीं होना चाहिए कि सेना में अनपढ और गरीब लोग ही जाते हैं
मैंने केन्द्रीय विघालय आइ एन एस हमला - मुंबई में एक साल पढाया है
वहॉ के बच्चे कहते थे सिविलियन लाईफ
हमें तो पसन्द नहीं है
हम तो फोर्स में ही जाएगे
जल ,थल और वायु सेना तीनों में बडे रेंक से लेकर से सिपाही सब होते हैं
इसके अलावा बीएस एफ और रिजर्व पुलिस
सबको हर रोज लोहा लेना होता है
दुश्मन के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थिती जैसे बाढ और प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ पब्लिक की उग्र भीड का भी
दुश्मनों की गोली की बात तो छोडो
सामान्य जनता और उग्रभीड के पत्थर भी
सब अपनी जान हथेली पर लेकर चलते हैं
हमारे जनतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकार
आए दिन हमले होते रहते हैं
पर फिर भी वह अपना काम करते रहते हैं
धमकी मिलने से घर में नहीं बैठते
अगर पैसे के लिए ही काम करना होता तो सब बेरोजगार फौज में भरती हो जाते
यहॉ- वहॉ घूमेगे ,जबरन वसूली करेगे और लोगों को परेशान करेंगे
इससे तो सेना में भरती और सीमा पर लडने वाला युवा है
पैसों के लिए किसी की जान नहीं लेता
देश के लिए अपनी जान देता है
अपराध ,लूटपाटऔर चोरी- चकारी नहीं करता
शान से सीना तान देश और देशवासियों की रखवाली करता है
मरना तो सभी को है
पर एक शान से ,जीवन को सार्थक कर
तो दूसरा बदनामी का धब्बा बन

आंतकवाद और रिश्ता - साथ नहीं चल सकते

उरी में १९ जवानों की जान जाना
बिना कारण रक्त का बहना
और यह पहली बार नहीं है
हर बार सीमा पर बमबारी होती रहती है
जवानों के साथ जान- माल की हानि होती है
आंतकवादी और कलाकार अलग- अलग है
सही भी है पर यहॉ आकर जो नाम और पैसा कमाते हैं
उनका कोई फर्ज नहीं बनता
क्यों नहीं वे विरोध में बोलते
अभिव्यक्ति की आजादी तो है ना
हमारे कलाकार बोल सकते हैं उनके पक्ष में पर वे नहीं
कब तक क्रिकेट खेलेगे
कब तक उनके कलाकार यहॉ आकर अपनी कला दिखाएगे
पाकिस्तान तो आंतकवाद को शरण देता है
पालता- पोसता है और हमले करता है
कब तक भारत सहन करता रहेगा
इस समय भारत ने जवाब दिया है वह सही है
संयम की भी एक सीमा होती है.
अब भी उसे समझना चाहिए कि भारत कमजोर नहीं है
वह भी जवाब दे सकता है
पर पडोसी धर्म निबाहता है
सांस्कृतिक संबंध को सहेजे रखने की कोशिश करता है
मानवता की रक्षा करता है
मित्रता का सम्मान  कायम रखने की कोशिश करता है
उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री पर कितना दवाब था
हर देशवासी गुस्से में था
और यह हर बार होता है
जब सैनिकों के सर कटते हैं या जान जाती है
पर सरकार समझौते का प्रयास करती है
पाकिस्तान के हुक्मरानों और सामान्य जनता को यह समझना होगा
युद्ध तो किसी भी हाल में अच्छा नहीं होता
क्यों नहीं वे अपनी सरकार पर दवाब डालते
युद्ध का तांडव और स्टेज पर नृत्य एक साथ तो नहीं चल सकता.
शॉति चाहिए मनोरंजन के लिए
जान जाती रहे और कलाकार मनोरंजन करे
यह कैसे संभव है
आक्रोश तो स्वाभाविक है
पाकिस्तान के कलाकारों का योगदान है
हमारी फिल्में भी वहॉ खूब चलती है
हमारे कलाकार वहॉ लोकप्रिय है
पर फिर भी देश की आन- बान और शान से बडा तो कुछ भी नहीं..
तुम मारते रहो और हम हाथ जोडते रहे
तुम बम फेकों और हम फूलों का गुलदस्ता दे
तुम रक्त बहाओ और हम प्यास बुझाए
हम समझौता एक्सप्रेस चलाए और तुम गोली चलाओ
बस बहुत हो चुका
एकतरफा प्यार और दोस्ती
हाथ दोनों तरफ से बढे
दिल दोनों तरफ से मिले
नहीं तो बम और गोली का जवाब तो बम और गोली ही होगा
फिर वह उत्तर का प्रत्युत्तर हो या हमारी मजबूरी हो
पर हमारे धीरज की और परीक्षा न ली जाय
बुद्ध और गॉधी का देश है
जहॉ शिवजी को भोलापन तो है साथ में तीसरा नेत्र भी है
जिसके पास भस्म करने की भी शक्ति है
चेत जाओ नहीं तो आने वाला कल किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा