Saturday, 6 December 2025

बच्चें हैं कर्जदार नहीं

उडने दो इन परिंदो को
करने दो मनमानी
जितनी भी ऊँची उडान भरना चाहे भरने दो
मत डालो 
इनके पैरों में
कर्तव्य की
प्यार की
ममता की बेडियाँ
जीना इनका अधिकार है
उस अधिकार पर हावी होने का प्रयास मत करो
अपनी इच्छा नुसार करने दो
कभी ऊपर कभी नीचे कभी बीच में 
यह तो होता ही रहेंगा
पंखों को मत कतरे

अपनी आशा आंकाक्षा उन पर मत लादे
माना तुमने जन्म दिया है
पालन पोषण किया है
इसका यह मतलब तो नहीं
कि उसका जीवन गिरवी रख दिया
अंजाने में ही सही
अपना गुलाम बना दिया
जो तुमने किया 
वह कर्तव्य था तुम्हारा
अपनी खुशी के लिए किया
अपना घर गुलजार होने के लिए किया
कोई एहसान नहीं किया
तब एहसास भी नहीं दिलाना है
हमने तुम्हारे लिए इतना किया
और तुम हो कि ' '' '' 

सब बच्चों को पालते हैं
पशु-पक्षियों से सीखो
वह भी दाना ला चोंच में डालती है
अपने बच्चे के लिए मुर्गी , चील से लड जाती है
वही जब ये बडे हो जाते हैं तब छोड़ देते हैं
कोई अपेक्षा नहीं

कोई कर्ज नहीं है कि
वह सूद समेत अदा करें
इसीलिए जन्म दिया कि 
मेरे बुढापे की लाठी बनें
सहारा बनें
मेरी इच्छानुसार चले
तब तो यह निरा स्वार्थ हुआ

अपेक्षा सदा दुख ही देता है
आपने अपना कर्म किया
वह उसका धर्म है
वह करें या न करें
करें तब भी ठीक
नहीं तब भी ठीक
कोई मलाल नहीं पालना है
किसी पर भार नहीं बने
अपनी लाठी अपना सहारा स्वयं बनना है
अपने लिए भी सोचना है
भविष्य को तो बडा करना है
साथ में अपना भविष्य भी सुनिश्चित करना है

Friday, 5 December 2025

सबसे वाकिफ हैं

मुझे अपने बारे में सब पता है 
मैं कहाँ सही कहाँ गलत 
इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हूँ 
मुझे क्या करना चाहिए 
क्या नहीं करना चाहिए 
क्या किया 
उससे भी अंजान नहीं 
अंजाम भी भुगता है 
कोई शिकवा - शिकायत नहीं 
कर्म किया मैंने फल भी तो भुगतनी पड़ेगी मुझे 
किसी और को बताने और जताने की जरूरत नहीं 
अपनी जिंदगी अपने हाथ 
नहीं किसी का चाहिए साथ 
साथ मिला तो भी ठीक 
न मिला तो भी ठीक 
हर कंकरीले- पथरीले रास्तों पर चली हूँ 
हर आग में तपी हूँ 
फूल बिछे नहीं मिले थे राहों में
चलती रही अब भी चलना जारी है 
गिरने से डर नहीं 
हारने की परवाह नहीं 
सब मुझे समझे यह संभव नहीं 
वह क्या समझे मुझे जो इन रास्तों पर चले ही नहीं 
मंजिल उनको आसानी से मिल गई 
सब लोग इतने खुशनसीब नहीं होते 
न कोई वरदहस्त न किसी का गुरुर 
तब भी कोई गम नहीं 
हम अकेले ही चले 
बीच-बीच में रुक भी गए 
फिर चल पड़े 
ईश्वर का हाथ और साथ रहा हमेशा 
तभी तो हर राह आसान होती गई 
अपनी राह ही नहीं दूसरों की भी राह में उनके साथ रही 
वे आगे निकल गए 
हम वहीं ताकते रह गए 

ऐ धरती

धरती कितनी सहनशील है तू 
कितना कुछ होता है 
तब भी सबको समेटे रखती है 
अपनी संतानों का अतिक्रमण सहती रहती है
तेरे प्यार को ये समझ नहीं पाते 
कभी-कभार गुस्सा हो जाती है 
कुछ संकेत दे देती है 
फिर भी ये नहीं सचेतते 
अपने ही नाश पर ऊतारु रहते हैं 
ये सोचते नहीं है 
कि क्या कर रहे हैं 
किसमें इनकी भलाई है 
तू भी कब तक इनकी मनमानियों को बर्दाश्त करती रहेगी 
हर बार चोट पहुंचाते हैं 
हर समय तकलीफ देते हैं 
तू फिर भी उफ्फ नहीं करती 
अपना प्यार बरसाती रहती है 
ये बम - बारूद बरसाते हैं 
तुझे छलनी करते रहते है 
आखिर कब तक 
होता रहेगा 
ऐसा 

खुशी का पैमाना क्या ???

खुशी का पैमाना क्या ??
ढूँढने चली 
बात नहीं बनी 
वहाँ नजर आई 
जहाँ मैं खुश होकर भी खुश नहीं थी 
शांति ढूंढ रही थी 
वह भी शांत जगह पर नहीं दिखी 
न महसूस हुई 
अशांति में ही शांति दिखी 
जीवन माया - मोह है 
व्यर्थ में जकड़े हुए हैं 
यहाँ कोई किसी का नहीं 
उस जकड़न में ही स्वतंत्रता दिखी 
बंधन में ही आनंद लगा 
इतनी उलझन 
सुलझाने बैठी 
सुलझा न पाई 
गुस्सा भी उन्हीं से प्यार भी उन्हीं से 
निराशा भी उन्हीं से आशा भी उन्हीं से 
उपेक्षित भी उन्हीं से अपेक्षित भी उन्हीं से 
लगता है सबसे संबंध खत्म कर दूं 
संन्यास ले लूं 
दुनियां से संबंध तोड़कर मुक्त हो जाऊ 
मुक्ति भी आसान नहीं 
जीवन भी चाहिए 
मृत्यु भी स्वीकार नहीं 
जिनसे तिरस्कार वहीं जीवन आधार 
क्या गूढ़ रहस्य जीवन का 
नर्क में रहना नहीं चाहते 
स्वर्ग में शांति नहीं मिलेगी 
मोह - माया में जकड़ा इंसान 
मकड़ी के जैसे बुने अपने जाले में उलझा - पुलझा 
यह अपना ही जाल तोड़ नहीं पाता 
जाने क्यों वह जान बूझकर अंजान बना रहता है 
कहना चाहता है कह नहीं पाता 
सब कुछ जानते समझते चुप रहता है 
असत्य और गलत को स्वीकार करता है 
अपने को दोषी मान लेता है बिना दोष के 
न जी पाता है न खुश रह पाता है 
सबको खुश रखने की कोशिश में स्वयं को खत्म करता रहता है 
अपना वजूद मिटाता जाता है 
फिर भी वह ईश्वर से यही कहता है 
    रहने दो हे देव 
          मेरा मिटने का अधिकार 
स्वर्ग का सुख नहीं भाता मुझे 
          धरती की गोद में ही संघर्ष रत रहने दो