Wednesday, 23 September 2026

बांट न लैहें कोय

कहना तो बहुत कुछ था
मन की बाते थी
मन में ही मुसमुसाकर रह गई
हमेशा फुसफुसाती रहती थी
बाहर आने को बेताब
पर कोई मिल न सका
इन्हें कोई सुन न सका
समय की कमी थी कुछ के पास
कुछ पर विश्वास न था
भय था अंदर
अगर बाहर आई
तो सार्वजनिक न बन जाए
गुप्त रहना चाहती थी
वह कहाँ संभव था
बहुत लोग बेताब थे
सुनने को उत्सुक थे
एक टाॅपिक मिल जाता गाॅसिप का
जो उनके लिए सबसे बडा टॉनिक
उसके बिना भोजन पचता नहीं इनका
इनकी मानसिक खुराक है यह
कुरेदते रहते हैं
कुछ तो मिले जो मन को भाए
ऐसे में कहना सुनना सब बेमानी
मन की बात मन में रखना ही सबसे बडी समझदारी
सुन इठलैहे बाँट न लैहे कोय
मन की मन में रखे
सावधान रहें
यहाँ शिकारी ताक में है
खुराक की फिराक में है
मनोरंजन का जरिया ढूंढने में लगे
तब सतर्कता भी जरूरी

Sunday, 20 September 2026

मैं चांद हूँ

मैं चांद हूँ
नीरव और शांत
शुभ्र और चलायमान
मेरी रोशनी मद्धिम-मद्धिम
किसी की ऑखों में चुभती नहीं
मुझमें सूर्य जैसा तेज नहीं
वह प्रकाश नहीं
फिर भी मैं हूँ
मेरा अस्तित्व है
मैं गतिशील हूँ
मेरी भी प्रतीक्षा होती है
मैं सुकून देता हूँ
कोई भी मुझसे नाराज नहीं होता
सबको साथ लेकर चलता हूँ
छोटे छोटे तारों को भी टिमटिमाने देता हूँ
मुझमें भी दाग है
फिर भी सौदर्य की बात हो 
तब मेरी ही उपमा दी जाती है
कोई भी परिपूर्ण नहीं
तब मैं कैसे
कभी घटता हूँ
कभी बढता हूँ
कभी संभलता हूँ
मैं जो हूँ
जैसा हूँ
सबका प्यारा हूँ
बच्चों का मामा हूँ
सुहागिनो का प्यारा हूँ
प्रेमियों का साथी हूँ
कवियों का दुलारा हूँ
शिवजी की जटा पर विराजमान हूँ
ईद की छटा में शोभायमान हूँ
मेरे बिना तो तारे भी अधूरे
मैं अंधकार में सहारा हूँ

मैं तुम्हारा प्यारा चांद हूँ

Saturday, 19 September 2026

मां हूँ

आज बहुत थकान लग रही है
मन विचलित हो रहा है
कुछ करने का मन नहीं है
घुटनों का दर्द बढ गया है
आज पूरा दिन आराम करूँगी
यह सोच चादर ओढ लिया

अचानक आवाज आई
माॅ माॅ माॅ
दरवाजा खोलो जल्दी
बहुत भूख लगी है
खाने को कुछ दो

अरे तू तो कल आने वाला था
तब फिर
आज काम हो गया तो गाडी पकड़ ली
घर पर चल भर पेट खाऊँगा
और जी भर कर सोऊँगा
आज बस आराम करना है
अभी फ्रैश होकर आता हूँ

आराम गया तेल लगाने
चलो किचन में
कुछ बनाओ 
इतनी दूर से आया है 
थका हारा , भूखा प्यासा

अरे तुम्हारे दर्द का क्या 
आराम का क्या
अचानक अंदर से आवाज आई
हंसते हुए कहा
सब काफूर हो गया
मैं माॅ हूँ न
मेरा दर्द क्या और आराम क्या ??

शुक्रिया

मैंने देखा आज 
एक खूबसूरत गुलाब का फूल
पेड़ - पौधों को झूमते
मैंने देखा आज 
सूर्योदय की लालिमा को 
कुनकुती धूप को 
मैंने देखा आज
शुभ्र नीले आकाश को 
बादल को भ्रमण करते 
मैंने देखा आज 
हवा को लहराते- झूमते 
समुद्र के उठान - चढ़ाव को 
मैंने देखा आज
चिड़ियों को चहचहाते 
मुर्गे को बाग देते 
सुबह का संदेश देते 
मैने देखा आज
अपने को आईने में 
मुस्करा कर बोला जैसे वो 
क्यों इतनी मायूसी क्यों चेहरे पर
फिर दिन हुआ है 
नया जीवन मिला है 
सांस चल रही है 
सब कुछ सही - सलामत है 
एक शुक्रिया तो अदा कर दो 
जिंदगी देने वाले का

Friday, 18 September 2026

अंदर - बाहर

बाहर कितना कुछ बदला 
लोग बदले 
परिस्थिति बदले 
अंदर कितना बदला 

बाहर सब दिखावा है 
एक तरह का छलावा है 
अंदर का अंदर रह जाता है 
बाहर कभी आ ही नहीं पाता 
बंधनों में बंधा 
यह अंदर - बाहर 
कभी एक सा हो नहीं पाता 
एक - दूसरे से मिल नहीं पाता 

खुशी ???

रिश्ता तो था बहुत खास 
खास बात नहीं समझ पाए 
कुछ बहुत अपने होते हैं 
फर्क इतना कि 
उनसे अपने मन की बात नहीं कह पाते 
कहने जाए तो सुनना भी नहीं चाहते 
उनके लिए यह सामान्य सी बात है 
सबकी परिस्थिति एक सी होती नहीं 
यह बात हमको भी पता है 
हंसो - खिलखिलाओ 
पार्टी मनाओ 
इससे खुशी नहीं मिलती 
चार घड़ी बैठ कर बात करने का 
सुख - दुख बांटने का समय नहीं 
उस झूठमूठ की हंसी में रूदन अंदर ही अंदर टीसता रहता है 
कब तक बनावटी रहेंगे 
मन की भावना चेहरे पर आ ही जाती है 
तब सब फिजूल लगता है 
मन खुश तो सब खुश 
मन नहीं खुश तो सब फीका 
स्वयं खुश रहें तभी दूसरों की खुशी भी भाती है 

क्या गम है तुम्हें 
इसकी किसी को क्या खबर 
सब अपनी खबर बताने में मशगूल 
किसी को क्या पड़ी 
तुम्हारी खैरियत की 

यह रह गया - वह रह गया

वैसे जीवन में बहुत ज्यादा महत्वकांक्षा कभी रही नहीं 
जो मिला जैसा मिला बस उसी में संतोष कर लिया 
ऐसा नहीं था कि आसपास ऐसे लोग नहीं थे 
सहकर्मीं नहीं थे दोस्त नहीं थे 
पर पता नहीं स्वभाव ही ऐसा था 
किसी चीज ने आकर्षित नहीं किया 
न सजने संवरने का शौक 
न मंहगे - कपड़ो- गहनों का शौक 
न गाड़ी - बंगले का शौक 
न मंहगे होटल में खाना और घूमने का शौक
एक अदद साधारण सी जिंदगी जी मैंने 
शायद परवरिश भी उसी तरह हुई 
हाॅ कभी पीछे मुड़कर देखती हूँ 
तब कहीं न कहीं कुछ छूटा सा लगता है 
जो उस समय नहीं लगा 
बच्चों को भी उसी हिसाब से ढाला 
ऐसा नहीं था कि कंगाली थी 
शौकीन लोग कर्ज लेकर भी शौक पूरा करते हैं 
मैं पता नहीं किस मिट्टी की बनी हुई 
कभी-कभार वैसे अवसर भी मिले 
पर मैंने उसका लाभ नहीं उठाया 
आज जब सब है 
तब न वह उम्र बची है न वैसी शक्ति
शौक जरूर रखे 
उसे पूरा भी करें 
ज्यादा नहीं सीमा में 
अपने बच्चों की इच्छाओं को भी मारे नहीं 
उनको सब भरपूर अपनी सामर्थ्य नुसार देने का प्रयास करें 
ताकि जब अतीत को देखे तो आपको मलाल न हो 
अरे यह रह गया 
वह रह गया 

Thursday, 17 September 2026

ठहराव

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है 
अपनों को छोड़कर दूर जाना पड़ता है 
यही प्रकृति का नियम है 
पेड़ अपने पुराने पत्तें गिराता है 
तभी उसमें नये पत्तें आते हैं 
सांप भी अपनी केंचुली उतार कर नया धारण करता है 
आना - जाना लगा रहता है 
नदी भी पहाड़ को छोड़कर निकलती है 
तभी पूजी जाती है 
जीवनदायिनी बन जाती है 
गोपाल भी गोकुल छोड़कर गए 
द्वारिकाधीश बने 
पांडवों के विधाता बने 
राम वन गए तभी अपना परचम फहराया 
जीवन सजीव है 
चलायमान है 
रूक गया तो वही ठहर गया 
तो चलते रहे 
ऐसे भी यहाँ हमेशा के लिए कोई नहीं आया है 
जीवन भी छोड़ना पड़ता है 
तब गांव क्या 
शहर क्या 
अपने क्या 
दोस्त- रिश्तेदार क्या 
सब छूटते जाते हैं 
नए जुड़ते जाते हैं 
ठहरिए मत 
ठहराव कभी ऊपर नहीं ले जा सकता 

Tuesday, 15 September 2026

बस उसे खुश देखना चाहती हूँ

बेटियां तो बहुत होती है 
पर मेरी बेटी जैसी कोई नहीं 
वह कभी पापा की परी नहीं रही 
न माॅ की नाजुक कोमल गुड़िया 

वह फौलाद सी मजबूत है 
मैं उसको संभालना चाहती थी 
न जाने कब उसने संभालना शुरू कर दिया 
उसका हाथ पकड़कर रास्ता दिखाते कब वह मुझे रास्ता दिखाने लगी 
उम्र से पहले ही समझदार हो गई 
मेरे कंधों के बोझ को अपने कंधों पर ले लिया 

मैंने बहुत से सपने देखे थे 
उसकी राह कभी मुश्किल न हो 
ऐसा सोचा था 
दुनियाभर का हर सुख और खुशी मिले यह हर मां की तरह मेरी भी इच्छा थी 
मेरे जीवन जैसा जीवन न मिले 
कभी लाचार और मायूस न हो 

वैसे हर परिस्थिति पर मात करना सिखाया है 
फूल और नाजुक कली जैसा नहीं पोसा है 
हद दर्जें की मेहनती 
वर्कोहलिक लगती है 
कभी सोचती हूँ 
मैं थोड़ा भी इसकी तरह मेहनती होती 
लोग मां से सीखते हैं 
मैं उससे सीखती हूँ 

माँ भी बन जाती है मेरी 
डरती भी हूँ 
कुछ गलत तो नही कर दिया 
अपने पालकत्व पर अभिमान होता है 
गलत बर्दाश्त नहीं उसे 

बस ईश्वर से यही प्रार्थना 
मैं तो कुछ न कर पाई 
तुम तो अपनी कृपा बनाए रखना 
मेरे जीवन के अच्छे कर्मों का फल उसकी झोली में डाल देना 
मैं और कुछ नहीं चाहती 
बस उसे खुश देखना चाहती हूँ 

आप स्वयं

व्यक्ति कुछ न कुछ करने में लगा है 
उसे अपने से ज्यादा दूसरों की चिंता है 
उसे प्रभावित करना है दूसरों को 
किसी को सुंदर दिखना है 
किसी को धनी दिखना है 
किसी को बुद्धिमान दिखना है 
किसी को शालीन और परोपकारी दिखना है 
किसी को धार्मिक दिखना है 
किसी को कर्तव्य वान बनना है 
किसी को सबकी नजर में अच्छा दिखना है 
सबके लिए तो ठीक है 
अपनी नजर में ??
दूसरों को प्रभावित करने से क्या हासिल होगा ??
हम अपने लिए जीने आए हैं 
ना कि दूसरों के लिए 
लोगों की परवाह करते - करते ऐसा तो नहीं कि हम अपने को पीछे छोड़ रहे हैं 
ये वे लोग हैं जो कभी भी छोड़ सकते हैं आपको 
स्वयं को आगे रखे 
बाकी सबको पीछे 
आप आगे रहेंगे तो सब आएगे पीछे 
आप पीछे रहेंगे तो कोई मुड़कर नहीं देखने वाला 

Monday, 14 September 2026

जो साथ चले थे

साथ चले थे न जाने कितने 
नए भी जुड़े पुराने भी रहे 
सबने अपनी राहें बाद में अलग-अलग कर ली 
पता नहीं कहाँ हैं 
कुछ का पता कुछ का नहीं 
सबकी अपनी जिंदगी 
सबकी अपनी सोच 
सबकी अपनी जरूरतें 
सबकी अपनी मजबूरी 
किसी की नौकरी किसी का परिवार 
किसी का घर किसी का शहर 
समय बदलता है तो लोग भी बदलते हैं 
बचपन से लेकर अब तक न जाने कितने मिले 
कितने बिछुड़े 
उसका हिसाब ही नहीं है 
कुछ जेहन में आज भी है 
कुछ विस्मरण हो गए 
सबका अपना वजूद था 
अपना प्रभाव था 
अंत तक साथ कोई नहीं देता 
अंत तक जो साथ दें बस वहीं असली साथी 
ऐसे बस कुछ ही होते हैं 
सबको नहीं आता साथ निभाना 
वैसे भी सृष्टि का नियम है 
मिलना और बिछुड़ना 
आना और जाना 
यह नवीन सृजन की मांग है 
पतझड़ होगा तभी तो वसंत आएगा 
पुराना जाएगा तभी तो नया आएगा 
संबंधों पर भी यही बात लागू होती है 

वक्त

सुना है वक्त एक सा नहीं रहता 
बदलता जरूर है 
इस बदलने की प्रक्रिया में न जाने क्या-कुछ छूट जाता है 
कभी - कभी तो ठहर ही जाता है 
यह ठहराव बहुत इंतजार करवाती है 
तब वक्त भी वह नहीं रहता जैसा पहले था 
वक्त की ये भी तो खासियत है 
गया वक्त वापस नहीं लौटता 
अंधकार की सुबह भी निश्चित ही है 
पर उसमें भी ग्रहण लग जाता है 
वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता 
पर वक्त पर वक्त भी तो नहीं रहता 

हिन्दी दिवस की शुभकामना

14 सितम्बर हिन्दी-दिवस 
सब मना रहे हैं  हमारी अपनी भाषा है 
हमारी पहचान है 
सत्य यह भी है 
हम बात हिन्दी की करते हैं लेकिन अंग्रेजी हर जगह छायी है
वह अपना विस्तार भी करती जा रही है
ग्रामीण अंचल में भी लोग अंग्रेजी माध्यम में भेजना पसंद कर रहे हैं 
वास्तविकता तो स्वीकार करना पडेगा 
अंग्रेजी रोजी - रोटी की भाषा है
साथ- साथ एक और विवाद छिडा है
भारत और इंडिया नाम को लेकर 
इंडिया नाम हमको नहीं चाहिए क्योंकि वह अंग्रेजी है
नाम नहीं चाहिए अंग्रेजी भाषा चाहिए 
अंग्रेज तो चले गए, अंग्रेजी रच - बस गयी है 
नींव रख कर गए है जो वह बहुत मजबूत है
हिन्दी क्या सारी भारतीय भाषाओं का कमोबेश यही हाल है
तब हिन्दी का क्या ??
उसका महत्व बताना पडेगा 
अंग्रेजी को तो छोड़ नहीं सकते 
लेकिन अपनी भाषा को भी न छोड़े 
जो अपनी माता का आदर न करें और दूसरों की माता का 
उसका क्या फायदा 
हिन्दी हमारी अपनी है
उसे बोलने में शर्म नहीं गर्व महसूस करें 
यह हमारे राष्ट्र की पहचान है
उसको कायम रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है ।

Sunday, 13 September 2026

विधाता का विधान

जन्म और मृत्यु??
किसी का आगमन किसी का प्रस्थान 
किसी की ऑख खुली 
कोई हमेशा के लिए सो गया 
किसी पर गाजे - बाजे और बधाई 
किसी पर चार कंधों का सहारा 
किसी पर हंसी - खुशी 
किसी पर रूदन - दुख 
किसी से आशा - आकाक्षा 
किसी से घनघोर उदासी - निराशा 
किसी के आने की प्रतीक्षा 
किसी के जाने की प्रतीक्षा
किसी के आने से हर्ष की लहर
किसी के जाने से गमगीन सब
आने पर खुशी से भोज बरही बारह दिन पर
जाने पर भी दुख में भोज तेरही तेरह दिन पर
एक गर्भ से बाहर आ रहा 
एक इस लोक से बिदा ले रहा 
इस आवागमन को रोका नहीं जा सकता 
सब ऊपर वाले के हिसाब से 
बड़े - बड़े शूरमा  कुछ न कर पाए 
स्वर्ग तक की सीढ़ी बनाते - बनाते स्वर्ग की राह हो लिए 
इच्छामृत्यु का वरदान पाकर भी मृत्यु को वरण कर लिया 
अश्वत्थामा भी यहाँ कोई नहीं बनना चाहता 
जीना सब चाहते हैं 
अमरता कोई नहीं 
यही प्रकृति का नियम है 
एक भूतकाल है 
दूसरा भविष्य की धरोहर है 
आते हैं सब रोते हुए 
जाते हैं रुलाते हुए 
सबका अंत होना निश्चित है 
यह विधाता का विधान है 
जिस पर किसी का कोई वश नहीं 

Friday, 11 September 2026

मरने दो ??

मरना तो तय है 
सबको तो मरना ही है एक दिन 
फिर क्या फर्क पड़ता है 
क्यों मरे 
कभी कोचिंग क्लास में आग लगने के कारण 
कभी गेस्ट हाउस के ढहढहाकर गिरने के कारण 
कभी बेरोजगारी के कारण 
कभी रैंगिग के कारण 
कभी गढ्ढे में गिरने के कारण कंस्ट्रक्शन साइट पर
कभी फेल होने पर
कभी अंक कम आने पर
कभी एडमिशन न मिलने पर
कभी किसी दूसरे की बेपरवाही से एक्सीडेंट 
और भी कारण है 
यह हमारा युवा वर्ग है 
देश का भविष्य 
किस राह पर 
समझ नहीं पाए रहा 
उपरोक्त कारण के जिम्मेदार कौन ??
सरकार - प्रशासन??
मरने दो 
पहले ही मर गये ???

Wednesday, 9 September 2026

पाषाण ???

कभी-कभार मन में ख्याल आता है 
पत्थर को कठोर कहा जाता है 
आखिर क्यों ??
वह जो हर परिस्थिति में अडिग रहता है 
जरूरत पड़ने पर अपने को मोड़ भी लेता है 
उस पर छेनी - हथौड़ी चलती है 
उसका कलेजा छलनी होता है 
तब भी वह अपने को उस मूर्ति में ढाल लेता है 
उस पर खुदाई की जाती है 
नाम उकेरे जाते हैं 
अपने को मिटाकर दूसरों का नाम चमकाता है 
मंदिर में स्मारक पर 
टूटता भी है बिखरता भी 
समुंदर के लहरों के थपेड़े सह रेत बन जाता है 
कण - कण टूटता है 
इतना होने पर भी पाषाण है 
कठोर है 
उपमा मिल गया है 
उसको उसी रूप में देखना 
औरों की खातिर 
         उसने स्वयं को मिटाया 
औरों ने उसे पाषाण कहा 
               न जाना उसकी महत्ता 
जो सदियों से अपनी छाती पर 
           उनकी महत्ता दर्शा रहा 

Tuesday, 8 September 2026

पुत्र और पुत्री

कान्हा का जन्म तो सबको याद रहा
याद रहना भी चाहिए 
जगत के पालनहार का जन्मदिन था
उत्सव मनाने का दिन था
उस दिन एक और शिशु का भी जन्म हुआ था
वह थी योगमाया 
कान्हा तो गोकुल पहुँच गए 
मामा कंस के कोप का भाजन बनी थी वह बेटी
जिसने कहा था
तुम्हारा काल तो गोकुल में जन्म ले चुका है
बेटा - बेटी दोनों ही संतान 
तब खुशी के हकदार तो दोनों ही
वह योगमाया ही थी जिनको बदलकर वसुदेव कृष्ण को ले गए थे
कृष्ण की जीवन रक्षा का कारण वह बनी
सबको जीवन देने वाले का जीवन बनी
कन्हैया के साथ उनका भी स्मरण करना जरूरी है 
देवकी की आठवीं संतान तो पुत्र ही था यह तो नियति लिखित था 
कंस वध तो उनके द्वारा ही होना था पर जन्मते तो वध नहीं करते 
मनुष्य लीला करनी थी 
उस दिन भी एक पुत्र को बचाने के लिए पुत्री को सामने किया गया था
दोनों का जीवन बहुमूल्य ही था

Sunday, 6 September 2026

अस्तित्व

वह बड़ा पेड़ था 
बड़ा मजबूत और डटकर खड़ा था 
कुछ की नजरों में खटकता था 
इसको ध्वस्त करने का उपाय??
लोगों के मन में कीड़ा कुलबुलाने लगा 
अब वे उसके पीछे पड़ गए 
पहले प्रेम से उसकी डालियां छांटी 
पत्ते तोड़ लिए 
अब वह उतना आकर्षित नहीं कर रहा था 
अब न पंछी आते न कोई नीचे बैठता 
छांव तो थी नहीं 
धीरे - धीरे वह सूखने लगा 
अब उन्हीं लोगों ने सलाह दी 
इसकी उपयोगिता खत्म हो गई है 
यह ठूंठ बन गया है 
काट डाला जाए 
कम से कम कुछ काम आएगा 
अब वह कट चुका है 
किसी के घर की फर्नीचर बन शोभा बढ़ा रहा है 
उसका अस्तित्व खत्म 

Saturday, 5 September 2026

जय कन्हैयालाल की

आज आगमन हो चुका है 
युगांधर कृष्ण का 
आज पधार चुके है 
मैया यशोदा के लल्ला 
जगत को गीता का उपदेश 
कर्म का सिद्धांत समझाने वाले 
अर्जुन के सखा का जन्म दिवस है 
आज हमारे कन्हैया का जन्मोत्सव है 
धूमधाम से मनाए 
गाजे - बाजे के साथ 
नाच - गाकर 
हाथी - घोड़ा - पालकी 
जय कन्हैयालाल की 

हर गुरू को नमन

मैं भूत , वर्तमान और भविष्य 
तीनों का कारण हूँ 
मैं शिक्षक हूँ 
भूत को सुधारता हूँ 
वर्तमान को गढता हूँ 
भविष्य को निर्माण करता हूँ 

मैं ज्यादा नहीं चाहता
हाँ इतना जरुर चाहता हूँ 
मेरा हर छात्र सफल रहें 
ऊंचाइयों तक पहुँचे
मैं ही वह हूँ 
जो आपकी सफलता देख कर इतराता है
गर्व से कहता है
यह मेरा स्टूडेंट हैं 
हम ही ऐसे हैं जो आपको ऊपर चढते देख जलते नहीं 
न हतोत्साहित करते
बल्कि प्रोत्साहित करते 

हम ही वह हैं 
जहाँ हमें कोई एक नहीं सब प्रिय 
फिर वह चाहे कैसा भी हो
सबको एक ही जैसा ज्ञान 
हमारी नजरों में सब समान
हमारा एक भी छात्र असफल न हो
यही हमारी इच्छा 
क्योंकि तुम्हारी सफलता और असफलता के बीच हम जो हैं 
क्या यही सीखा है  तुमने 
यह ताना सुनने की अपेक्षा 
यह सुनना 
न जाने इनके शिक्षक कैसे होंगे और इनकी पाठशाला 
जिनकी वजह से यह मुकाम हासिल है 
हम ईश्वर नहीं है 
न हम जन्मदाता है
पर उनके भी गुरू तो हम ही हैं 
गुरू बिना ज्ञान कहाँ 
             हमारी संपूर्ण गुरू जाति को नमन

Friday, 4 September 2026

अकेले कैसे ??

अकेले आए हैं अकेले जाएगे 
यही सुनते आए हैं 
क्या यह सच है ??
शायद नहीं 

जब इस दुनिया में जब कोई आता है 
तो किसी की खुशी 
किसी की उम्मीद 
किसी के सपने 
किसी की आशा - आकांक्षा 
और न जाने क्या-कुछ लेकर आता है 
किसी के लिए उसका पूरा जग ही वह होता है 

जब इस दुनिया से कोई जाता है 
तो क्या अकेले जाता है 
नहीं कदापि नहीं 
वह बहुत कुछ साथ ले जाता है 
किसी का तो सब कुछ 
यहाँ तक कि जीवन भी 
उसका साथ 
उसकी यादें 
उसके साथ गुजारे पल 
जो वापस फिर नहीं आता 

यह कोई भ्रम में न रहें 
अकेले आए अकेले जाएगे 
अकेले तो आप जन्म भी नहीं ले सकते 
मां - बाप की जरुरत होती है 
जन्म से पहले ही रिश्ता जुड़ जाता है 
गर्भ में आते ही सबकी निगाहे 
लगी रहती है इंतजार में 
खुशियाँ मनाई जाती है 
मिठाई बांटी जाती है 
सोहर गंवाया जाता है 
तुममें किसी को सारी दुनिया दिखाई देती है 
लकड़ी के झूले से लेकर अर्थी तक का सफर अकेले कर ही नहीं सकते 

जीवन में सभी का योगदान 
बहुत अमूल्य है 
संभाल कर रखें 
अपना ही मत समझे 

गोपाल से कृष्ण बनने की प्रक्रिया

आज मेरे कन्हैया का जन्मोत्सव है 
माॅ यशोदा का यशोदोत्सव है 
माखन मिसरी मुख पर लगा हुआ 
गाय  चराते कान्हा 
मार खाते गोपाल
गोपी संग रास रचाते 
ग्वालों संग हुड़दंग मचाते 
बांसुरी बजाते 
यह रूप सभी को भाता है 

इसका दूसरा रूप भी 
कंस और पूतना का वध करते 
कालिया पर नृत्य करते 
हस्तिनापुर के दरबार में विराट रूप दिखाते 
कुरूक्षेत्र में सारथी बन गीता का पाठ पढ़ाते 
सुदर्शन चक्र घुमाते 

बांसुरी से सुदर्शन की यात्रा 
इतना आसान तो नहीं हुआ होगा 
माखन से विदुर घर साग - रोटी खाना 
मां के आशिर्वाद से मां गांधारी के श्राप की स्वीकारता 
हमेशा स्मित हास्य 
भांजे अभिमन्यु की मृत्यु 
 अपने ही कुल को लड़ते - मरते देखना 
अंत में एक बहेलिएं के बाण से मृत्यु 

बहुत कुछ सहा 
बहुत कुछ सीखा 
बहुत कुछ किया 
इस प्रक्रिया में उनका दिल किसी ने नहीं देखा 
जो राधा के लिए धड़कता था 
कर्म के बंधन में जो बंधे तो कभी मुक्त ही न हो जाए 

अपने बच्चों को भरपूर प्यार दें 
बाद में तो जिंदगी के महाभारत में उतरना ही है 
कान्हा से शुरुआत कर कृष्ण तो बनना ही है 
तब तो स्वाभाविक है 
आप यशोदा भी बने 
जिंदगी के महाभारत में वह हार नहीं माने 
स्मित हास्य से सामना करें 

Thursday, 3 September 2026

तुम --

तुम जो भी हो लाजवाब हो 
ईश्वर की अनूठी रचना हो 
किसी के जैसे नहीं होना तुम्हें 
अपने आप में बहुत खूब हो 
हर रुप में तुम पूर्ण हो 
नहीं किसी से कमतर हो 
जो भी हो वह हो 
नहीं कोई गिला - शिकवा रखो 
बड़ी अनमोल हो किसी के लिए 
दुनिया की छोड़ो 
अपनी दुनिया में मस्त रहो 

मत रुको

मत रुको चलते रहो 
चलना जरूरी है इसलिए नहीं 
चलना तुम्हारा स्वभाव है इसलिए 

हंसो , हंसते रहो 
हंसना है इसलिए नहीं 
हंसना - मुस्कराना हर परिस्थिति मे तुम्हें आता है इसलिए 

गिरो और उठो 
उठते रहो 
उठना जरूरी है इसलिए नहीं 
उठना तुम्हें आता है इसलिए 

समझौता करना तुम्हें आता है 
इसलिए नहीं करना 
तुम्हें अपने निर्णय पर भरोसा है इसलिए 
होगा जो चाहता हूँ 
यह ईश्वर पर भरोसा है 

असफलता से तुम्हें डर नहीं 
प्रयास जारी रखे 
इसलिए नहीं कि अब कुछ नहीं हो सकता 
असफलता को सफलता में बदलाव करना तुम्हारा स्वभाव है 

नैतिकता पर कायम रहना आता है 
भले कितनी भी बुराई हो 
तब भी अच्छाई तुमको भाता है इसलिए 

इस दुनिया से अब भी लगाव है 
इसलिए नहीं कि दुनिया बहुत बुरी है 
अच्छाई अभी भी कायम है 
विश्वास है तुम्हें 

यह जग किसी एक का नहीं 
तुम्हारा भी है 
प्रकृति का कण - कण तुम्हारा है 
रहना और स्वयं को स्थापित करना तुम्हारा अधिकार है 

Wednesday, 2 September 2026

समय का प्रभाव

तालियाँ बजी 
लोग खुश हुए 
बातें - ताने भी दिए 
यह उस समय जब समय खराब चल रहा था 
जिंदगी हिचकोले ले रही थी 
कहते हैं 
समय बदलता जरूर है 
बदला भी 
तालियाँ फिर बजी 
लोग खुश भी दिखाए स्वयं को 
बातें - ताने भी दिए 
यह भी उस समय जब समय अच्छा हो गया 
लोग तो वही थे 
स्वाभाविक है 
प्रतिक्रिया भी उनकी ही होगी 
बुरा हो या अच्छा
बोलना तो है ही 
चुप कैसे रहेगे 
कभी गिराना कभी उठाना 
यह तो इनकी आदत में शुमार 
न करें परवाह 
अपने ही प्रवाह में बढ़ते जाए 
समय सबका असली चेहरा दिखा देगा 
वह ऐसा आईना है 
जिससे कभी कुछ छुपता नहीं है