किन शब्दों में वर्णन करू माँ तुम्हारी
यहाँ तो शब्द ही निशब्द
जहाँ शब्द असमर्थ
वही से तुम
तुम क्या हो
भूखे पेट का पहला कौर
अंधेरे में पहला प्रकाश
वेदना में पहली पुकार
तपते सूरज में पहली आग
सुलाने में तुम्हारी गोद
सर पर हाथ फेरने वाली ममता
हर कुछ तुमसे
तुमसे इतनी अपेक्षा उतनी ईश्वर से भी नहीं
जब सब असमर्थ तब तुम समर्थ
पता है
वह ना न कहेंगी
हर फरियाद भी तुम्ही से
सारा रोष भी तुम पर
सारी कुंठा और निराशा भी तुम पर
सारी शिकायत भी तुम्हीं से
पता है
सारा विष स्वयं पी जाओगी
अमृत मुझे दे दोगी
ईश्वर तो नहीं हो तुम
अगर ईश्वर की जगह तुम होती
तब ऐसा भाग्य लिखती
संतान को दुख का साया भी न पडने देती
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