Tuesday, 2 June 2026

मां

किन शब्दों में वर्णन करू माँ तुम्हारी
यहाँ तो शब्द ही निशब्द
जहाँ शब्द असमर्थ
वही से तुम
तुम क्या हो
भूखे पेट का पहला कौर
अंधेरे में पहला प्रकाश
वेदना में पहली पुकार
तपते सूरज में पहली आग
सुलाने में तुम्हारी गोद
सर पर हाथ फेरने वाली ममता
हर कुछ तुमसे
तुमसे इतनी अपेक्षा उतनी ईश्वर से भी नहीं
जब सब असमर्थ तब तुम समर्थ
पता है 
वह ना न कहेंगी
हर फरियाद भी तुम्ही से
सारा रोष भी तुम पर 
सारी कुंठा और निराशा भी तुम पर
सारी शिकायत भी तुम्हीं से
पता है
सारा विष स्वयं पी जाओगी
अमृत मुझे दे दोगी
ईश्वर तो नहीं हो तुम
अगर ईश्वर की जगह तुम होती
तब ऐसा भाग्य लिखती
संतान को दुख का साया भी न पडने देती

No comments:

Post a Comment