अच्छाई ही हमेशा परेशान होती है
उसमें उसका क्या दोष
इसका हल क्या
क्या अच्छाई छोड़ दें
यह भी नहीं होगा
संस्कार ही ऐसे नहीं है
तब रहना तो है इसी संसार में
सही है
तब भी शुक्रिया करो उस ईश्वर का
जिसने तुम्हें ऐसा मन दिया है
तुम अच्छे हो
किसी के बारे में बुरा नहीं सोचते
न करते हो
न बदला लेते हो
न अपशब्द कहते हो
न बद्दुआ निकलती है
इससे अच्छा और क्या
तुम अपना काम करो
सब बुरे नहीं है यहाँ भी
अच्छे लोगों की बदौलत दुनिया टिकी है
राम भी यही और रावण भी यही
चुनाव तुम्हारा है
क्या बनना है
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