यह कैसे जताए
आप तो हैं नहीं इस लोक में
परलोक वासी हो गए हैं
श्रद्धापूर्वक, श्राद्ध करना
यही पृथ्वी वासी कर सकते हैं
वे करते भी हैं
अपनों को याद करना
उनके लिए जल अर्पित करना
भोजन बनाना
दान करना
गाय को चारा खिलाना
वह सब शायद आप तक पहुंचे या न पहुंचे
पर अगर देख रहे हो ऊपर से
आशीर्वाद तो अवश्य दे रहे होंगे
उनकी गलतियों को माफ कर रहे होंगे
आप जन्मदाता है
आपसे यही उम्मीद रहती है
संतान का क्या
वह गलती करती रहती है
कहा गया है ना
क्षमा बड़न को चाहिए
छोटन को उत्पात
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