Thursday, 8 October 2026

अब नहीं चलेगा

पत्नी घर वापस लौटी 
तब वह चरित्र हीन 
पुरुष वापस लौटा 
भटक गया सही रास्ते पर आ गया 

बलात्कार हुआ 
दोषी सर उठाकर घुम रहे 
वीडियो शूटिंग कर दिखा रहें 
जिसका हुआ 
वह मुंह छिपा रहा 
उसके परिजन शर्मसार हो रहे 
उसमें ही दोष निकाला जा रहा 
छोटे कपड़े पहने होगी 
रात में देर तक बाहर क्यों रही 
अकेले नहीं जाना था 
दोस्त के साथ क्यों घूम रही थी 

लड़का है पुरुष है 
उसका सब कुछ माफ है 
यही सोच संस्कार में पड़े हैं 

माता जानकी पर भी लांछन लगा दिया गया था 
एक प्रजा के द्वारा 
उनको भी राजमहल से निष्कासित होना पड़ा 
कभी यह भी कहा गया 
उन्होंने लक्ष्मण रेखा क्यों पार की 
द्रोपदी को भरी सभा में चीरहरण की कोशिश 
यह भी दलील किसी - किसी की 
व्यंग्य क्यों किया 
अंधे का पुत्र अंधा 
गलत था
पर इतनी बड़ी सजा 

उन मां - बहनों की क्या गलती 
जो हर बात में हर जबान पर गाली सुनती है 
गलती पुरुष करता है 
गाली उसकी मां - बहन और बेटी पर
शहर में तो गनीमत है 
गांव में तो बिना गाली बात ही नहीं 

आज समय बदल रहा है 
अब औरतों का नजरिया और सोच बदल रही है 
अब पति वह परमेश्वर नहीं रहा 
जिसकी मार खाकर भी वह संबंध निभाती थी 
बच्चों का मुख देखती थी 
मां - बाप की इज्जत की परवाह करती थी 

अब वह सोच रही है 
जब मेरी ही इज्जत नहीं तो क्यों किसी की परवाह 
कोई भी कदम उठा रही है 
समाज लाचार बना देख रहा है 
कह रहा है 
जमाना बदल गया 

जमाना बदल गया 
तुम उसी सोच में अटके हो 
खुद को बदलो 
जितनी जिम्मेदारी उसकी उतनी तुम्हारी 
घर वह चलाए मालिक तुम 
अब नहीं ऐसा चलेगा 
परिवर्तन जारी है 

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