Friday, 9 October 2026

रोटी

मैं रोटी हूँ 
आप सब मुझसे अंजान नहीं 
हर जगह मेरी मांग है 
मुझे बनाना इतना आसान नहीं 
बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं 
पहले गूंथना 
फिर कटना लोई में 
फिर तवे पर चढ़ना 
दोनों तरफ सेंकना 
फिर फूलना 
तब जाकर थाली में आना 
उदर तृप्ति करना 
मेरा अलग अलग आकार 
कुछ भी मुझमें मिलाकर स्वादिष्ट बना लो 
ऐसा लगा रोटी 
मुझसे यह सब कह रही है 
जीवन भी तो ऐसा ही है 
खूब निचोड़ता है यह 
तब जाकर कहीं कुछ हासिल होता है 
सफलता केवल अपने लिए नहीं 
सबके लिए होती है 
परिवार खुशहाल हो जाता है 
हर किसी की आशा जुड़ी रहती है 
रोटी की तरह सींकना तो पड़ेगा 
तभी जीवन खुशियों से फूलेगा 

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