Sunday, 5 October 2014

युवा अपनी ताकत को पहचाने …

हाथ में पत्थर, होटो पर नारा,
यह है आज के युवा की तस्वीर,
जब भी किसी राजनितिक पार्टी को जरूरत होती है,
तो अपने हथियार के लिए युवाओ का इस्तेमाल करते है,
युवा भी जोश में आकर नारे बजी, तोड़ - फोड़ करना शुरू कर देता है,
चुनाव के समय तो इनका भरपूर इस्तेमाल किया जाता है,
कितने सारे बेरोज़गार युवा है जो काम करने की बजाय कभी त्योहारो का तो कभी चुनाव का इंतज़ार करते रहते है, ताकि यह समय खा - पी कर आराम से कटे,
बाकी समय ताश के अड्डे जमाय हुए यहाँ - वहॉ बैठ कर टाइम पास करता हुआ मिल जायेगा।
काम की कमी नहीं है, पर खेती करने में शर्म, ड्राइवर, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, वॉचमैन बनने में शर्म।
छोटा - मोटा रोजगार करने में शर्म,
अगर भारत में हर कोई काम करने की सोच ले तो भूखा तो कोई नहीं मरेगा।



Saturday, 4 October 2014

लो भूली बात फिर याद आगयी - यह आकाशवाणी है।

यह आकाशवाणी रेडियो है, यह हवामहल है,
यह बिनाका  गीत माला है, अमिन सयानी की आवाज़,
आज तक कानो में गुजती है।  फौजी भाइयो का कार्यक्रम,
पुराने सदाबहार गीत, क्रिकेट की कमेंट्री, नए - नए अतिथियों को बुलाना,
समाचार, नेताओ के भाषण, क्या दिन थे वे, हमेशा इन कार्यक्रमों का इंतज़ार रहता था।

आज टीवी के सामने बैठ कर रिमोट कभी इस चैनल पर तो कभी उस चैनल पर,
एक भी कार्यक्रम व्यवस्थित नहीं देख पाते,
रेडियो को वापस लाना  अपने आप में बड़ा कदम है,
आज भी सबके पास टेलीविज़न नहीं है, लेकिन रेडियो तो जन - जन तक पहुंच सकता है।

मोदीजी की यह पहल सराहनीय है तथा मन की बात में उनका भाषण काफी प्रेरणादायी लगा।
आज पूरे संसार में रेडियो डे मनाया जा रहा है 
भारत में इसे फिर से वापस लाने  का श्रेय मोदी जी को है
उनकी मन की बात को गौर से सुना जा रहा है
अब फिर से रेडियो की आवाज गूंजने लगी है
रेडियो कहीं गया नहीं था 
किसी न किसी रूप में विद्यमान था।।


Friday, 3 October 2014

विजयादशमी … अधर्म पर धर्म की विजय।

विजयादशमी, अधर्म पर धर्म की, बुराइओं पर अच्छाई की विजय,
यह युद्ध दो व्यक्तियों का युद्ध नहीं बल्कि दो विचार धाराओ का युद्ध था,
एक ओर अहंकारी और कामी रावण तो दूसरी तरफ मर्यादापुर्षोत्तम राम,
रावण का दस मुख काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, मत्सर आदि का प्रतिक है,

सारे द्वेष, ईर्ष्या, द्भेष, भेदभाव को ख़त्म कर दशहरा मनाए,
मानव का मानव से प्रेम हो,इंसानियत, मानवता, सेवा की भावना से परिपूर्ण हदय  हो,
स्वतंत्र व्यक्ति, संगठित समाज को भावी पीढ़ी के सामने रखे,
हर व्यक्ति, समाज और देश की जय ही सच्चे अर्थो में विजयादशमी है।

राम जैसे नम्र, विचारशील और महान बने,
रावण जैसा विद्वान बने,
सारी इच्छा का दमन कर,
केवल अच्छा इंसान बने।
रावण जैसे महाप्रतापी ,विद्वान ,चारो वेदों के ज्ञाता ,और शिव के महान भक्त को उसके अहम " मैं " ने मारा
अंहकार सब खत्म कर देता है.

Thursday, 2 October 2014

महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट लेगी ???

महाराष्ट्र की राजनीति, नए - नए समीकरण बना रही है,
घडी रुकने को तैयार नहीं, हाथ को किसी का साथ नहीं चाहिए,
कमल को कोमल नहीं पड़ना और शिवशेना को अपने तरकश से तीर नहीं छोड़ना,
सब अड़े हुए है, सबको मुख्यमंत्री बनना है,

अपने तो अलग हुए ही जनता को भी अलग - अलग बाट दिया,
अब तो प्रांतवाद, भाषावाद और जातिवाद जोर पकड़ेंगे,
देश विकास और महाराष्ट्र का विकास छोड़ सब अपना अपना  विकास करने में लगे हुए है,
किसका बहुमत, किस का अल्पमत यह तो समय ही बताएगा,
पहले दिल्ली, फिर मुंबई बिना मुख्यमंत्री के,
यह हमारे महान भारत के महानगर है,
इन महानगरो को हमारे महान नेता कहाँ ले जा कर खड़ा करेंगे पता नहीं।

एक आर्थिक राजधानी, और दूसरी राजनितिक,
दोनों का भविष्य देश के इन कर्ण धारो पर अवलम्बित है,
अतः सभी समझदारी से काम ले, आपसी सहमति बनाए तो अच्छा है,
कही ऐसा न हो की ये पार्टिया वापस चुनाव के कगार पर खड़े हो।