Saturday, 2 June 2018

संसार

हम आए है अकेले
जाना भी अकेले
आने मे भी हमारी मरजी नहीं
जाने मे भी हमेशा इच्छा नहीं
कहाँ जन्म लेना
किसके घर लेना
किस शहर मे लेना
परवरिश कैसी होगी
यह तो हमें नहीं पता
पर हम क्या करते हैं
यह भलीभांति पता है
क्या करना है ,यह भी
पर दोष देने मे हम पीछे नहीं रहते
चाहे माँ -बाप हो या ईश्वर
स्वयं को नहीं देते
यह भूल जाते हैं
कर्मों के उत्तरदायी हम ही है
कर्म साथ चलता है
इसका चुनाव भी हमारा
इसमें किसी की भागीदारी नहीं
परिणाम भी हमें ही मिलना है
संसार मे रहना है
तो अपनी पहचान बनाना है
किसी की दी हुई नहीं
क्योंकि उसकी उम्र नहीं होती
अपने सामर्थ्य पर भरोसा करना है
संसार मे आए तो जीना भी सीखना है

Friday, 1 June 2018

मिट्टी से रिश्ता

मिट्टी से कितना मीठा रिश्ता हमारा
अब वह धीरे -धीरे छूट रहा
मिट्टी का वह घर
गर्मी मे भी देता था ठंडी का एहसास
आज वह जगह ईंटों को मिल गई
खुद तपता औरों को भी तपाता
मटका और सुराही
की जगह फ्रिज
ठंडा -ठंडा कूल -कूल
पर पेट और गले की ठंडक
वहाँ तो मटका ही भारी
बिसलरी और प्लास्टिक पर सुराही भारी
कुल्हड़ मे चाय की चुस्कियां
वह मजा औरों मे कहाँ
मिट्टी का बर्तन
मिट्टी के खिलौने
सब हो रहे अदृश्य
बच गया.छोटा सा दिया
पर अब वह भी बुझने की कगार पर
हम मिट्टी से दूर हो रहे
मिट्टी मे खेलने की बजाय मोबाइल से खेल रहे
मिट्टी तो माँ है
सहलाती है , दुलारती है
गिर भी गए तो मुस्कराकर उठा देती है
बारीश मे मिट्टी मे छप -छप करने का मजा
मिट्टी का बना चूल्हा अब कहाँ
मिट्टी सान कर पौधे लगाना
वातावरण को हरा -भरा.बनाना
पशु -पक्षियों का मिट्टी में लोटना
मिट्टी सबको अपने मे समाहित करती
उसी से हम दूरी बना रहे
विकास करना है
पर अपनी माटी को नहीं भूलना है
मिट्टी से ही तो अनाज उपजता है
सबका पेट भरता है
मिट्टी मे ही जीव पनपते
मिट्टी मे ही जीवन पलता
मिट्टी मे ही अंत मे समाता
अपने आगोश मे लेती
शांति की नींद सुलाती
मिट्टी है अनमोल
हम सब है उसके कर्जदार

आम

फलों का राजा आम
पर यह ही क्यों ??
यह आम नहीं खास है
सबका प्रिय फल है
बच्चे , जवान.बूढे
गरीब -अमीर
हाँ  ,  कोई मंहगा खाता तो कोई सस्ता
कोई हापुस तो कोई तोता पायरी
कच्चा हो या पक्का
खट्टा हो या मीठा
छोटा हो या बडा
सबमें चाव
साल भर यह घर मे रहता
अचार बन खाने का स्वाद बढाता
भोजन मे कमी को पूरा करता
बिना इसके खाना अधूरा
सब्जी की जगह काम आता
रोटी का साथी बन जाता
आमरस और पूरी बडे -बडे को लुभाती
अचार मुख मे पानी ले आता
आम है इसलिए तो खास है

हवा

हवा चलती है
हम साँस लेते हैं
हवा आती-जाती है
साँस भी आती -जाती हैं
हम जीवित रहते हैं
हवा न रहेगी तब हम भी न रहेंगे
इसे न रोके न टोके
मनमौजी करने दे
भटकने दे
बांध कर मत रखना
साँसों की डोर है यह
दूषित भी नहीं करना है
ख्याल रखना है
यह न चलेगी तो जीवन भी नहीं चलेगा
यह साधारण नहीं है
हमारी जान है
यह सुकून है
यह अटकी तो हमारी साँस अटकी