जय श्री राम का नाम हर हिंदू की शान
उसी राम जी के नाम पर ओछी राजनीति
राम जन जन के है
हर हिंदू के आदर्श
वह बंगाल हो या यू पी
उनको बांटना
किसी नेता के सामने जानबूझकर नारा लगाना
राम मर्यादा पुरुषोत्तम है
यह तो सरासर मर्यादा का उल्लंघन है
राम को सडक पर लाकर खडा कर दिया
अब तक पार्टी और नेताओं के नाम पर नारे लगते थे
अचानक ऐसा क्या हो गया
आए दिन फसाद हो रहा है
शायद भगवान राम यह नहीं चाहते होगे
वे तो सिंहासन त्याग करने वाले
वनगमन कर गए
पर लडे नहीं
हर पार्टी के अपने नेता है
सबका सम्मान है
यह जो नारा लग रहा है
वह जानबूझकर उकसाने के लिए होरहा है
राम सबके हैं
वह किसी एक पार्टी के नहीं
उनका इस्तेमाल इस तरह किसी का क्रोध भड़काने
ओछी हरकत के लिए जगह नहीं
मंदिर में जाय
वही राम नाम जपे
किसी की गाडी के सामने नहीं
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Sunday, 2 June 2019
राम का नाम बदनाम ना करो
तकिया
तकिया तू है कितना अजीज
मेरे एकांत का साथी
जब नीरव और अंधेरी रात हो
जब सर तुझ पर रख चैन
जब उदास हो मन
जार जार रोने को करे
तब सबसे छुपाकर मेरे आंसू की टपटप टपकती बूंदे
अपने में समेट लेता
जब मन क्रोध में हो
तुझ पर जी भर गुस्सा निकाल लिया
जब अकेलापन लगे
तब साथ में चिपका कर सो लिए
जब खुशी महसूस हुई
तब तुझे सीने से लगा लिया
खेलने का मन हुआ
तुझे उछाल लिया
माँ ,दोस्त ,साथी हर रूप में
हल्की फुल्की भी है
मन को भी हल्का करती है
रूदन को छिपाती है
तुझसे ज्यादा भरोसे का साथी कौन होगा
प्यार समर्पण चाहता है
तुम्हारे पास रहकर भी खालीपन लगता था
तुम्हारे दूर जाने पर भी वही खालीपन
समझ नहीं पाती कि
यह क्या है??
प्यार शायद नहीं
यह साथ रहने की मजबूरी है
प्यार समर्पण चाहता है
उसमें समझौते को स्थान नहीं
समझौता तो मजबूरी का दूसरा नाम
प्यार में अंहकार और अहसान नहीं
अहसास की अहमियत होती है
जो तुममें कभी नहीं थी
फर्ज अदा किया
टूट कर प्यार कभी नहीं
उसीकी परिणति आज नजर आ रही है
न तुम्हे फर्क
न हमें फर्क
हाँ , रीतापन अवश्य
Saturday, 1 June 2019
बहुत कुछ कहता है यह मन
बहुत कुछ कहता है यह मन
स्वयं से ही बातें करता है
समझाता है
परेशान करता है
उलझाता भी है
राह भी दिखाता है
हौसले भी देता है
धीरज देता है
हमें अच्छी तरह समझता है
गलत - सही का फर्क बताता है
पर हम इसकी सुनते नहीं
अपनी मनमानी करते हैं
सब साथ छोड़ दे
मन नहीं छोड़ता
ध्यान से इसकी बातों पर मनन करें
यह कभी मझधार में नहीं भटकाएगा