Sunday, 4 August 2019

Happy friendship day

हर दोस्त खास है
सबमें कुछ न कुछ बात है
कभी किसका तो कभी किसका
हर एक का साथ है
बिना दोस्तों के जीवन असहाय
अकेला कोई क्या करें
साथ तो बना देता है
जीवन खुशगवार
मन खोल कर रखना
उसको अपना समझना
हर रिश्ता से बडा
है यह दोस्तों का रिश्ता
दोस्ती से जीवन
दोस्त ही जीवन आधार
बिना उनके जीवन निराधार
दोस्तों से हमेशा कायम रखे रिश्ता
इससे जीवन का आसान बन जाएगा
हर मुश्किल से मुश्किल रास्ता

Thursday, 1 August 2019

भूख का धर्म नहीं होता

भूखे पेट भजन न होय गोपाला
पर यहाँ तो भोजन का ही धर्म पूछा जा रहा है
अन्न उगाने वाला भी किसान ही है
फल - सब्जी उगाने वाला भी किसान ही है
अब वह तो कोई भी जात का हो सकता है
किसी भी धर्म का हो सकता है
झोमेटो का खाना इसलिए अस्वीकार
क्योंकि डिलीवरी ब्वाय मुस्लिम
फिर तो बनाने वाला
परोसने वाला वेटर
उसका भी धर्म क्या
यह जानना जरूरी
आज इक्कीसवीं सदी में ऐसा दकियानुसी ख्याल
हर जगह हर धर्म के जाति के लोग कार्यरत
किससे किससे दूरी बनाए रखेंगे
दूधवाला ,पाववाला ,बेकरी ,केक ,ब्रेड
कामगार ,मजदूर ,ड्राइवर
किसका ,किसका धर्म पूछेगे
फिर पेट का धर्म तो भूख ही है

अब तो सुकून से जीने लो

अम्मा तुम ऐसी क्यों हो
सबसे इतना प्यार
सबके लिए तत्पर
अब तो इन बूढी हड्डियों में जान भी नहीं रही
तब भी इतना करना
अब तक बहुत किया
अब तो कुछ आराम करो
कुछ दूसरों को भी करने दो
वैसे वह तुम्हारी जगह नहीं ले पाएंगे
पर देखो तो
सबको सबके हाल पर छोड़ दो
कब तक तुम रहोगी
तुम्हें भी तो जाना होगा
जाने से पहले कुछ तो आराम कर लो
वैसे तुम्हारे नसीब में आराम कहाँ
आज तक करती ही आई हो
यह सब तुम्हारी ही बदौलत है
हम तुमसे ही है
तुम्हारा ही प्रतिरूप है
निश्चित रहो
सब अपने को संभाल लेंगे
सक्षम जो बनाया है
दुनियादारी जो सिखाई है
जीवन से लडना सिखाया है
यहाँ कोई हार मानने वाला नहीं है
मजबूत लडाकू है
बस अब तो तुम चिंता छोड़ दो
आखिर के पल सुकून कर लो

जिंदगी का इम्तहान

जिंदगी इम्तिहान लेती है
हर पल ,हर क्षण
हम समझे या न समझे
वह हमें समझाती है
शिद्द्त से सिखाती है
कभी रूलाती है
कभी हंसाती है
कभी-कभी परेशान भी करती है
हम उसमें रास्ता तलाश करते रहते हैं
यह महान गुरु है
इसकी परीक्षा कभी खत्म नहीं होती
हम खरे उतरने का प्रयत्न करते हैं
यह कोई न कोई नया दांव चल देती है
उसमें हमें उलझा देती है
हम निकलने का प्रयत्न करते हैं
पर यह ऐसा होने नहीं देती
जाने अनजाने हमें उस मुकाम पर पहुँचा देती है
जहाँ से पीछे नजर डालने पर हम सोचते हैं
यह वाकई हम ही है
तब लगता है
इम्तिहान में उत्तीर्ण हो गए