Friday, 1 July 2022

Happy Dactors day

तुम इंसान हो भगवान नहीं
यह तो हम सब जानते हैं
ईश्वर की याद तो हमें हर मुश्किल घडी में आती है
पर जब बीमारी आती है
तब सबसे पहले तुम्हारी याद आती है
आशा रहती है
तुम ठीक कर दोगे
जीवन का प्रश्न जहाँ तुम वहाँ
मंदिर में नहीं जाते
तुम्हारे यहाँ आते हैं
ईश्वर तो दिख जाते हैं
पर तुम्हारा तो इंतजार करते हैं
हमको तो तुममें ही खुदा दिखता है
यह तो हुई  हमारी बात

अब आप अपनी बताओं
क्या तुमको भी मरीज में भगवान दिखता है
कहते हैं कि ईश्वर तो हर रूप में है
हर जगह है
इंसानियत और मानवता ही धर्म है
मानव सेवा ही ईश्वर भक्ति है
जीवन दाता हो आप
तब तो आपका भी कर्तव्य है
निस्वार्थ सेवा
हर भेदभाव से परे

ईश्वर के दरबार में
अमीर गरीब सब बराबर 
उनकी दृष्टि तो समदर्शी होती है
संसार सागर में आकर उन्होंने भी अपना कर्म किया
आपको भी तो वह करना है
आप डाँक्टर ही इसलिए बने हो
कि हर समय मरीजों के लिए हाजिर हो
आपके लिए आपकी मर्जी से ज्यादा तवज्जों मरीज की

आप ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाए
सबकी दुआ ले
दिन दूनी रात तरक्की करें
बीमारी के तारणहार बने
दूसरों को जीवन देनेवाले
आपका जीवन खूब लम्बा हो
यही है सबकी शुभकामना
    Happy  Doctors  Day

हर डाँक्टर यह पढे

हर डाँक्टर यह पढें
अपनी ही किसी किताब में यह कहानी पढी थी
कहानी तो बडी है उसको मैं संक्षेप में ही बता रही हूँ

एक साधारण ग्रामीण खेत खलिहानों में मजदूरी कर गुजारा करने वाला
एक बार बेटे को बुखार आया । तप रहा था ।तबीयत बिगड़ती जा रही थी ।किसी ने सलाह दी
शहर के बडे डाँक्टर है उनके पास ले जाओ
वही ठीक कर सकते हैं
रात का समय था वह बेटे को कंधे पर लादकर पहुंचा
डाँक्टर साहब ने मिलने से मना कर दिया
रात हो गई है हमारा सोने का समय है
द्वारपाल को गेट बंद करने का आदेश दे अंदर चले गए
बेचारे गरीब के बेटे ने दम तोड़ दिया

समय बीता
कुछ बरसों बाद डाँक्टर साहब के बेटे को जहरीला सांप ने काट लिया
कोई औषधि काम नहीं कर रही थीं
किसी ने कहा कि फलां गांव में एक व्यक्ति है जो जहरीले से जहरीले सांप का जहर मंत्र द्वारा निकाल सकता है
डाँक्टर साहब को इन सब बातों पर विश्वास नहीं था
पर एकलौता जवान बेटे का प्रश्न था
उन्होंने आदमी भेजे पर आने को मना कर दिया
रात गहरा रही थी पर इस गरीब का मन नहीं माना
लाठी ठेगते पहुंच गए
आवाज दी
डाँक्टर साहब पैरों पर गिर पड़े
बचा लो मेरे बेटे को
जो मांगोगे वह दूंगा
अब इन्होंने अपने मंत्र विद्या के बल पर विष निकाल दिया
लडका ऑखे मलता हुआ उठ बैठा
डाँक्टर साहब ने खुश होकर कहा
क्या चाहिए
कुछ नहीं
याद कीजिए मैं वही हूँ जो अपने बेटे के इलाज के लिए आपके पास आया था
आपने वापस लौटा दिया
मेरा बेटा मर गया

पर मैं आप जैसा नहीं बन सका
मन तो हुआ 
मर जाने दो
पर ईश्वर ने मुझे यह हुनर दिया है जहर उतारने का
जान बचाने का
मैंने अपना कर्तव्य किया
आप भूल गये थे
आइंदा किसी मरीज को बिना देखे मत लौटाना ।
कहते हुए लाठी टेक गेट से बाहर निकल गए ।

धैर्य बनाए रखना

जीवन में धैर्य बनाए रखना
जब बीच मंझधार में फंस जाएं नैया
तब भी यह आस रखना
किनारा तो मिल ही जाएंगा

जब अंधड- तूफानों  का जोर हो
जब जोरो की बरसात हो
जब बिजली कडके कड- कड
छाए घनघोर अंधेरा 
तब भी मन के दीप जलाएं रखना
यह तूफान भी जाएंगे
बादल भी छट जाएंगे
फिर से सूरज निकलेगा

जब भी विपत्ति आए
विपरीत परिस्थिति छाए 
कुछ न सूझता हो
न कोई राह दिखता हो
तब भी यह विश्वास रखना
स्थायी यहाँ कुछ भी नहीं 
यह दिन भी बीतेगे 
विपदा भी भागेगी 

जब छा जाएं दुख के बादल
उसमें भी सुख की किरण ढूंढ लेना
आशा रखना
विश्वास रखना
धैर्य न खोना
हर रात की सुबह जरूर होती है
हर अंधकार का प्रकाश भी अवश्यभांवी है
बस धैर्य बनाए रखना।

खुदी को कर बुलंद इतना

यह नहीं मिला 
वह नहीं मिला
मेरे साथ ऐसा हुआ 
मेरे साथ वैसा हुआ 
बहुत अन्याय हुआ 
घर - बाहर कहीं भी न्याय न मिला
बार - बार मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची
मुझे नीचा दिखाने का प्रयास किया गया
दस लोगों के बीच मुझे अपमानित किया गया 
मुझे कोई  तवज्जों नहीं दी गई 
मेरे लिए किसी ने कुछ नहीं  किया
किसी का प्रेम और अपनापन नहीं मिला 
मेरी बात को सुना नहीं गया
मेरा तो भाग्य ही खराब है
मेरा कोई नहीं सुनता
बस मुझी पर दोषारोपण किया जाता है
कटघरे में खड़ा किया जाता है
अपनी गलती छुपाने के लिए मेरे कंधे पर रखकर बंदूक चलाई जाती है
ऐसा अमूमन किसी न किसी  शख्स से सुनने को मिलता है
हमारे मन में भी यह सब चलता रहता है

अरे जनाब  / मैडम 
छोड़िए इन बातों  को 
अपने को इतना नीचे मत गिराओ 
आप भिखारी नहीं है
जो आपको प्रेम और सम्मान भीख में मिले
भाग्य को दोष मत दो
अपना भाग्य खुद बनाओ
किसी के बनाने और बिगाड़ने से आपका कुछ नहीं होगा
न किसी के दोषारोपण करने से
यह तो लोग है कहेंगे ही
मुंह देखी बात करने की आदत होती है 
पर सत्य तो सत्य ही होता है 
कब तक छुपेगा 
उजागर होना ही है

सब छोड़कर अपना कर्म करें 
भीख में मांगी वस्तु नहीं टिकती है
लोगों को एहसास कराए
अपना महत्व बताएं 

खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे को बनाने से पहले खुद पूछें 
बता तेरी रजा क्या है ।