Friday, 20 December 2019

आज आपकी बारी है

आज जो वह बोलती है
हम समझ नहीं पाते
झल्ला जाते हैं
कितनी बार बोलो
न समझती है
न सुनती है
पर याद करो
यह वही औरत है
जो आपके बिना बोले सब समझ जाती थी
चेहरा पढ लेती थी
बच्चों को भूख लगी है
वे परेशान हैं
किसी ने कुछ कहा क्या??
उदास है
चिंतित हैं
किसी से झगड़ा हुआ
दोस्तों से कहासुनी हुई
ऐसी न जाने कितनी बातें
उसने बडा किया है
अपना सुख चैन समर्पित किया है
आपकी रग रग से वाकिफ है
तब आप अभी तक अंजान क्यों
आपने उसे समझने की कोशिश क्यों नहीं की
उसकी भावनाओ को पढने की कोशिश क्यों नहीं की
आप की तो वह बचपन से हमसफर रही है
तब आप अपने इस हमसफर  का जो सफर बाकी है
उसे तो प्रेम से भरें
ममता का आदर करे
उसे समझने का प्रयास करें
झल्लाकर नहीं प्रेम की झलक दिखाकर
जैसे वह आपके साथ हर पल मजबूती से खडी रही
कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया
वैसे ही आपको एहसास कराना है
यह एहसान नहीं कर्तव्य है
तब उसकी बारी थी
आज आपकी बारी है

बना रहे भाई चारा

शंख ,घंटा और अजान
कोई इनसे नहीं अंजान
यह भेदते है दिलों को
इनकी आवाज कानों से हो मन तक
स्मरण कराते ईश्वर का
ईश्वर की संतान सब
शांति और प्रेम ही हर मजहब का संदेश
ये गूंजते हैं
ये बोलते हैं
ये कहते हैं
इनकी ध्वनि तरंगित होती है
तन - मन में इनका संचार
फिर क्यों होता बवाल
जग का संचालन ऊपरवाला
हम तो बंदे उसके
रहे मिल जुलकर
बना रहे भाईचारा
सबको कफन में लिपटना है
कोई जलेगा तो कोई दफन होगा
पर गति तो सबकी एक ही
मिट्टी का शरीर मिट्टी में ही मिलना है
फिर जब तक शरीर में जान
तब तक कर ले कोई नेक काम
खुदा के पास खुद का हिसाब देना होगा
अपने हिस्से का
अपने किए का परिणाम भुगतना होगा
वह सब देखता है
फैसला भी करता है
तब ऐसा काम करें
जिससे सब फख्र महसूस करें

Thursday, 19 December 2019

नल बंद तो सब ठप

आज नल बंद है
जल बंद है
खाना बंद है
नहाना बंद है
धोना और पोछना बंद है
तब बाहर निकलना भी बंद
हर आवश्यक चीज बंद है
यह एक दिन की बात है
सोचो जब एकदम बंद हो जाय
तब क्या गति
आज बहाया तब कल भुगता
तब तो अब से सावधान
जल नहीं करना बर्बाद
नल बंद तो सब ठप
गति को विराम
सांस लेने में भी दिक्कत
पेट भरने में भी दिक्कत
स्वच्छता भी हो जाएगी बाधित
नल है तो जल है
जल है तो कल है
आनेवाला खुशियों का पल है
जल बिना जीवन नहीं

हर पल मूल्यवान है

सुबह हुई
सूरज निकला
सुनहरी किरणें पसरी
चिडिया चहचहाई
कली कली खिली
फूल मुस्कराए
सब जगह चहल-पहल
कहीं कौए की कांव कांव
कहीं रेलगाड़ी की घड घड
कहीं बस मोटर की पौं पौं
कहीं मंदिर की घंटी
कहीं मस्जिद की अजान
भगवान भी जागृत
अपने भक्तों की प्रार्थना सुनने के लिए
उनका भी नया श्रृंगार
नए वस्त्र और पुष्पों से
सब खुश
सब मग्न
तब हम भी तो जरा मुस्करा ले
जी भर कर जिंदगी का आनंद उठा ले
कल किसने देखा है यारों
आज की सुहावनी सुबह का लुत्फ उठा ले
उसकी सुनहरी किरणों से अपनी सोने जैसी जिंदगी चमका ले
हर पल मूल्यवान है
यह भी तो जान ले