कौन सी पुस्तक
कौन सा लेखक
किसने लिखा
भाग्य का लेखा
नया दिन नया पन्ना
उलट रहे हम
पता नहीं
अगले पन्ने पर क्या लिखा है
इससे अंजान हैं हम
कहानी कौन सा मोड लेगी
यह भी नहीं पता
बस अंदाज लगाते हैं
उम्मीद रखते हैं
डर लगता है कभी-कभी
पिछले पन्ने की गाथा से
तब भी आस लगा रहता है
इस साल कुछ अच्छा होगा
जिंदगी के समुद्र की अखंड गर्जना
तब भी सृजन का क्रम नहीं थमता
हम बालू से किनारे घर बनाते हैं
कण कण इकठ्ठा कर
कब कौन सी लहर आएगी
इसे बहा ले जाएंगी
इन सब से अनभिज्ञ
स्वयं को दिलासा देते हुए
जल भरे ऑखों से हंसते हुए
तुम्हारा बांह पसारे स्वागत करते हुए
नव वर्ष स्वागत स्वीकार करों
अगले पन्नों पर सब सुखद होगा
कहानी अभी तो शुरू ही है
सुखांत हो
नया हो
हटकर हो
बस यही कामना
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Monday, 10 January 2022
नव वर्ष में कामना
शब्दों के साथ चलें
शब्दों के साथ चले
शब्द कब , कहाँ और कैसे
यह जान ले
बडा पावरफुल है
बडे बडे काम करा सकता है
बडा घातक भी है
बडे बडे युद्ध करा सकता है
दुश्मनी करा सकता है
वैसे तो यह हथियार नहीं है
पर बडे बडे हथियार भी इसके आमने मात खा जाते हैं
यह जब बाणो का चाबुक मारता है
तब वह यहाँ वहाँ नहीं
सीधे हदय में जाकर लगते हैं
शस्र- अस्त्र का घाव भर जाता है
इसका घाव आसानी से नहीं भरता
कितनी भी मलहम पट्टी कर लो
नस्तर बन चुभते रहते है
बार - बार हरे भरे हो जाते हैं
कमजोर होता है व्यक्ति
वह सन्यासी- महात्मा तो होता नहीं है
तब वह शब्दों के साथ ही विचरण करता है
सोता , उठता , बैठता है
रात हो या दिन
वह मुक्त नहीं हो पाता है
शब्द की महिमा समझ लो
शब्दों के साथ चलें
तब ही भलाई है
खुशबू
खुशबू फूलों की हो
इत्र की हो
फल की हो
पेड़- पौधों की हो
एक आनन्द की अनुभूति कराती ही है
ऐसा नहीं है कि
बस इनमें ही खुशबू होती है
जीवों में भी होती है
कुछ पास लाते है
आकर्षित करते हैं
कुछ दूर करते हैं
सबसे खास खुशबू होती है
मानव की
उसके व्यक्तित्व की
अगर दया , प्रेम ,करूणा, परोपकार
उसमें समाएं हैं
तब उसकी इस खुशबू से लोग खींचे चले आते हैं
उसके सामने मन खोलना चाहते हैं
बतियाना चाहते हैं
ऐसा व्यक्ति सबको भा जाता है
उस पर विश्वास किया जा सकता है
वह इत्र भले न लगाएं
अपने गुणों की खुशबू से जग महका सकता है
यह जानलेवा डायबीटीस
बहुत खा लिया मीठा
अब बस करना है
क्योंकि जीना है
जीभ पर नहीं
जीवन में मिठास भरना है
क्या कडवा
क्या मीठा
अंदर जाकर बन जाता इनका घोल
कडवा भरता कडवाहट
मीठा भरता मिठास
ऐसा हमको होता है महसूस
चिकित्सक कुछ और ही कहते
शुगर के मरीज बन जाओगे
अब उम्र नहीं मिठाई की
बची है रूखी सुखी खाने की
चंद बरसों और पलों को
सुकून से गुजारने की
इसलिए सब शुगर के मरीजों से
गुजारिश है
अब मिठाई नहीं
बीमारी पर ध्यान दे
अनावश्यक और बीमारी को निमंत्रण न दे
स्वयं भी सुकून से रहे
परिवार जनों को भी रहने दें
यह जानलेवा डायबीटीस
करता है हर अंग पर जम कर प्रहार
खोखला कर डालता है तन
तब हो जाय
समय रहते सचेत