Monday, 31 July 2023

नारी - पुरुष

मुझे सुरक्षा की गारंटी चाहिए 
मुझे समान अधिकार नहीं चाहिए 
मुझे स्वतन्त्रता चाहिए 
घूमने - फिरने की आजादी चाहिए 
कपडे पहनने की आजादी चाहिए 
तुम मालिक बने रहो 
सब निर्णय लो 
मुझे कोई फर्क नहीं पडता
मैं महफूज रहूँ 
कोई गंदी नजर न डाले
तुम पुरूष हो तो आजाद हो
मैं नारी हूँ तो गुलाम हूँ 
ऐसा क्यों है 
हम भी मनुष्य है
हमारे ऊपर तमाम तरह की पाबंदी क्यों 
वह भी पुरूष जाति की थोपी हुई
तुम क्यों नहीं 
अपने जैसे जीने दे सकते हो
तुम्हारे कारण ही हम नारियां असुरक्षित महसूस करती है
घर से बाहर निकलने में डरती है
मनमुताबिक कपडे पहनने से डरती है
अकेले घूमने से डरती है
कब बदलोगे अपनी सोच
कहने को तो नर - नारी एक ही गाडी के दो पहिये 
होता वैसा है नहीं 
इसका जिम्मेदार केवल तुम्हारी सोच 

रूपये का मूल्य

आज टैक्सी पकड़ी 
गंतव्य पर पहुंचकर किराया दिया तो सौ रूपये 
छियान्वे हो रहे थे
टैक्सी वाले ने कहा 
छुट्टे नहीं है 
देर हो रही थी तो सोचा जाने दू 
फिर मन ने कहा 
नहीं,  यह लोग ऐसे ही करते हैं 
व्यक्ति की मजबूरी का फायदा उठाते हैं 
स्मृति में कुछ कौंध गया
हम बेस्ट की बस से स्कूल जाते थे
उस समय किराया पांच पैसे थे
जेब में से वह कहीं गिर गया था
कितना रोईं थी फिर चलकर घर पहुँची थी
बात रूपये की नहीं हिसाब-किताब की थी
अभी कुछ दिन पहले खबर आई थी कि एक नामी जूते की कंपनी पर किसी ने केस कर दिया था कि 999 का सामान 
एक रूपया वापस नहीं मिलता था
देखा जाएं तो एक एक रूपया छोडा जाएं तो हमारे देश में एक सौ तीस करोड़ का मुनाफा फ्री में 
पैसे हैं इसलिए पैसे का वैल्यू न करो 
यह सही नहीं है
हर रूपये का महत्व है
कहावत हैं न कि
कुएँ में डालना हो तब भी पैसा गिन कर डालें 
लक्ष्मी चलायमान है 
उनका सम्मान करना ही होगा 
नहीं तो अर्श से फर्श तक आने में देर नहीं लगती
एक - एक पैसे के लिए मोहताज हो जाता है व्यक्ति। 

शादी कब करोंगे ?

वह न विधवा है
वह न विवाहिता है
न वह परित्यक्ता है
वह एक नारी है
बिनब्याही
उस समाज की 
जहाँ विवाह ही सब कुछ है
बिनब्याही को कोई तवज्जों नहीं देता 
यह उसकी मर्जी है
उसके जीवन का निर्णय है
लेकिन किसी को इससे मतलब नहीं 
यह हाल औरतों का ही नहीं पुरूषों का भी है
यह हमारा भारतीय समाज 
जहाँ सब कुछ जाकर विवाह पर ही खत्म होता है
ब्याह हुआ मानों गंगा नहा लिए
आप कितने भी बडे बन जाओ
उन्नति कर लो
लेकिन एक प्रश्न पीछा नहीं छोड़ता 
शादी कब करोंगे  

खाना ???

मन की गति मन ही जाने
कभी-कभी रूखी  रोटी में भी स्वाद 
कभी-कभी लाजवाब पकवान भी फीके
एक समय ऐसा भी आता
जब किसी में स्वाद नहीं आता 
बस शरीर की जरूरत 
पहले खाने के लिए जीते
अब जीने के लिए खाओ
दाल - रोटी खाओ
प्रभु के गुण गाओ