गुरुवाणी अनंता
इसका अंत ही नहीं
हर मोड़ पर ज्ञान देने वाला कोई न कोई मिल ही जाता है
उम्र चाहे कोई भी हो
कुछ मालूम हो या न हो
उन्हें लगता है
दूसरे एकदम अज्ञानी हैं
वे अभी - अभी मां के गर्भ से बाहर आए हैं
कभी खाने पर
कभी स्वास्थ्य पर
कभी नैतिकता पर
उपदेश देना शुरु हो जाता है
अब क्या कहें
मूक श्रोता बने रहें
या उल्टा जवाब दे किनारा कर लिया जाए
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