Monday, 24 August 2026

अपनी दुनिया

मत सोचे 
यहाँ तो किसी ने मेरी बात सुनी नहीं 
मुझे समझा ही नहीं 
मेरी भावना को देखा ही नहीं 
मैं प्रेम बांटता रहा वो कमियां निकालते रहे 
मैं प्रयास रत रहा 
रिश्तें संभालने में 
वो करते रहें मुझे अनदेखा 
यह तो नहीं है कि सारी दुनियां उन्हीं तक है 
छोड़ दो ऐसे को 
संसार बहुत बड़ा है 
उस शहर को छोड़ दो 
उस गली को छोड़ दो 
उस कुएं के मेंढ़क की तरह मत बने 
जो कुएं को ही अपना सारा संसार मानता हो 
बहुत बड़ी दुनिया है 
जहाँ कद्र नहीं वहाँ जाना नहीं 
अपने पर भरोसा रखना 
बहुत लोग मिलेंगे 
विषधर रिश्ता बस डसेगा और कुछ नहीं 
बिच्छु की तरह समय-समय पर डंक मारता रहेगा 
जो स्वयं अपने को खत्म कर लेता है 
वह आपको क्या देगा 
अपने पौरुष पर विश्वास 
बेकार का झमेला क्यों 
हम अपनी दुनिया खुद बनाएंगे 
अपने हिसाब से चलाएंगे 
अपनी राह स्वयं निकालेंगे 
दुनिया बहुत बड़ी है 
याद रहें 
ये कुछ लोगों पर अपनी दुनिया सीमित न करें 

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