यहाँ तो किसी ने मेरी बात सुनी नहीं
मुझे समझा ही नहीं
मेरी भावना को देखा ही नहीं
मैं प्रेम बांटता रहा वो कमियां निकालते रहे
मैं प्रयास रत रहा
रिश्तें संभालने में
वो करते रहें मुझे अनदेखा
यह तो नहीं है कि सारी दुनियां उन्हीं तक है
छोड़ दो ऐसे को
संसार बहुत बड़ा है
उस शहर को छोड़ दो
उस गली को छोड़ दो
उस कुएं के मेंढ़क की तरह मत बने
जो कुएं को ही अपना सारा संसार मानता हो
बहुत बड़ी दुनिया है
जहाँ कद्र नहीं वहाँ जाना नहीं
अपने पर भरोसा रखना
बहुत लोग मिलेंगे
विषधर रिश्ता बस डसेगा और कुछ नहीं
बिच्छु की तरह समय-समय पर डंक मारता रहेगा
जो स्वयं अपने को खत्म कर लेता है
वह आपको क्या देगा
अपने पौरुष पर विश्वास
बेकार का झमेला क्यों
हम अपनी दुनिया खुद बनाएंगे
अपने हिसाब से चलाएंगे
अपनी राह स्वयं निकालेंगे
दुनिया बहुत बड़ी है
याद रहें
ये कुछ लोगों पर अपनी दुनिया सीमित न करें
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