Friday, 4 September 2026

गोपाल से कृष्ण बनने की प्रक्रिया

आज मेरे कन्हैया का जन्मोत्सव है 
माॅ यशोदा का यशोदोत्सव है 
माखन मिसरी मुख पर लगा हुआ 
गाय  चराते कान्हा 
मार खाते गोपाल
गोपी संग रास रचाते 
ग्वालों संग हुड़दंग मचाते 
बांसुरी बजाते 
यह रूप सभी को भाता है 

इसका दूसरा रूप भी 
कंस और पूतना का वध करते 
कालिया पर नृत्य करते 
हस्तिनापुर के दरबार में विराट रूप दिखाते 
कुरूक्षेत्र में सारथी बन गीता का पाठ पढ़ाते 
सुदर्शन चक्र घुमाते 

बांसुरी से सुदर्शन की यात्रा 
इतना आसान तो नहीं हुआ होगा 
माखन से विदुर घर साग - रोटी खाना 
मां के आशिर्वाद से मां गांधारी के श्राप की स्वीकारता 
हमेशा स्मित हास्य 
भांजे अभिमन्यु की मृत्यु 
 अपने ही कुल को लड़ते - मरते देखना 
अंत में एक बहेलिएं के बाण से मृत्यु 

बहुत कुछ सहा 
बहुत कुछ सीखा 
बहुत कुछ किया 
इस प्रक्रिया में उनका दिल किसी ने नहीं देखा 
जो राधा के लिए धड़कता था 
कर्म के बंधन में जो बंधे तो कभी मुक्त ही न हो जाए 

अपने बच्चों को भरपूर प्यार दें 
बाद में तो जिंदगी के महाभारत में उतरना ही है 
कान्हा से शुरुआत कर कृष्ण तो बनना ही है 
तब तो स्वाभाविक है 
आप यशोदा भी बने 
जिंदगी के महाभारत में वह हार नहीं माने 
स्मित हास्य से सामना करें 

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