जब तक हम अनुभव करते
जब तक किसी से कहते
वह खिसकता गया
दुख मिला
हम सहते रहे
किसी से कहने की हिम्मत न जुटा पाए
किसी से कहा
वह दूर तक फैला
मन मसोस कर रह गए
मलाल रह गया
इस सुख - दुख के चक्कर में उलझे रह गए
कब पता नहीं क्या हाथ से फिसल जाए
यही सोच डरते रहे
डर ऐसा बैठा
अब तो हर बात से डर
हर शख्स पर शंका
किसी पर विश्वास नहीं
जिंदगी की असलियत जान गए हैं
कब किस मोड़ पर ला खड़ा करें
कह नहीं सकते
कब आकाश की ऊंचाई तक पहुंचा दें
कब जमीन पर लाकर पटक दें
आज सब कुछ अच्छा दिखता है
कब उसमें भूचाल आ जाए
बड़ी कठिन है यह जिंदगी
यह हमारे हिसाब से नहीं चलती
हमें इसके हिसाब से चलना पड़ता है
ना जाने फिर भी कुछ बात है तुममें ये जिंदगी
तुमसे बहुत प्यार है
तुम अपना खेल खेलती रहो
हम भी पीछे नहीं हटने वाले
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