Tuesday, 3 November 2026

दुआ है हर की

आ रहा है भैया दूज 
इंतजार है सबको 
दीपावली के एक - दो दिन बाद ही यह आता है 
रौनक बढ़ा देता है 
सभी भाई-बहन को भैयादूज की शुभकामना 
मेरा भैया तुझे लंबी उमर मिले 
सारा सुख - वैभव मिले 
तू छोटा ही सही 
है हमारे घर का चिराग 
तू पिता नहीं पर उनसे कम भी नहीं
आस है बहन की 
तेरा - मेरा प्यार बना रहे
मेरा मायका सही - सलामत रहें
यही तो दुआ रहती है हर बहन की

Sunday, 1 November 2026

सब ठीक है ???

मैं इंतजार करती आ रही हूँ 
ना जाने कब से 
कब सब ठीक होगा 
मैं इत्मीनान से कह सकूं 
अब सब ठीक है 
वह समय अब तक आया ही नहीं 
एक खत्म कि दूसरा शुरू 
जिंदगी कुछ न कुछ लेकर उपस्थित हो जाती है 
मैं फिर जुट जाती हूँ 
उनका निवारण करने 
समाधान ढूंढने 
इसी जद्दोजहद में जिंदगी आखिरी सफर पर आ गई 
वह किनारे पर खड़ी है 
मैं किनारा न पा सकी 
प्रतीक्षारत हूँ 
कब सब ठीक होगा 
कारण भी है 
मैं अकेली नहीं हूँ ना 
मुझसे कुछ लोग जुड़े हैं 
ले मेरे जीवन का अभिन्न अंग हैं 
यू कहा जा सकता है 
वे जीवन ही है मेरा 
यहाँ अकेला कोई नहीं 
आता भी कहते हैं कि अकेला आया 
कहाँ कोई अकेला आता है 
मां के नाल से गर्भ में ही जुड़ जाता है 
बाहर आकर ना जाने कितने लोगों से जुड़ता है 
बचपन से वृद्ध  तक यह क्रम जारी रहता है 
आपके पास मकान है 
आपके अपनों के पास नहीं है 
आपके पास भोजन है 
अपनों के पास भरपूर नहीं है 
आपके पास पैसा है 
अपनों के पास अभाव है 
तब आप कैसे खुश रह सकते हैं 
आपके पास ना हो 
उनके पास हो 
तब भी आप खुश रह सकते हैं 
वह हुआ ही नहीं अब तक 
तब खुश कैसे रहा जा सकता है 
ना अकेले आए 
ना अकेले जाएगे 
इंतजार में हूँ 
कब कह सकूं 
अब सब ठीक है जीवन में 

Thursday, 29 October 2026

जीने का असली मजा

अपनों के आगे झुकने से कोई छोटा नहीं होता
अडकर बैठ रहने से जीना आसान नहीं होता
मन मसोसकर प्यार दबाने की अपेक्षा जताना
दिल से दिल  मिलाना कुछ ज्यादा मुश्किल नहीं होता
रिश्तों को पास लाना  उनकी कदर करना
उस आनंद से बडा कुछ नहीं होता ।
जोड़,  गुणा, घटाना 
मान - अपमान से ऊपर उठ 
जीना सहज हो जाता है
जीने का असली मजा आ जाता है ।

Wednesday, 28 October 2026

हाय मेरी प्यारी शराब

तू है मेरी जान
तेरे बिना मैं बेहाल
मेरे रातों की नींद तू
मेरे दिल का चैन तू
मेरी हमसफर
मेरे अकेलेपन की साथी
मैं और तू 
उसमें नहीं किसी और का काम
तुझसे बिछुडना नहीं गंवारा
कोई नाराज हो या खुश
उसकी नहीं कोई परवाह
तू ही खुदा मेरी
तुझमे सारा जग दिखता
मेरी दुनिया तुझमे समाई
एक बार जब थाम लिया
तब सब स्वर्ग का आंनद मिल गया
घूंट घूंट उतरती तब दिल को ठंडक मिलती
अमृत की बूंदों की तरह छलकती
गले को तर करती
कुछ न साथ बस हो तेरा साथ
तब क्या गम
मेरा सब गम तू हर लेती
सब दुख दर्द भूला देती
जब एक घूंट अंदर जाती
तब सब कुछ हो जाता हवा हवा
मदहोशी का आलम
साकी और प्याला
इससे दूजा न कोई प्यारा
तू ही मेरी जान
तू ही मेरा जहान
तुझ बिन लागे सब अधूरा
तू है मेरी प्यारी शराब

Tuesday, 27 October 2026

जो डरा वह गया

वह फूल क्या जिसमें कांटे न हो
वह डगर क्या जो पथरीली न हो
वह नदी क्या जिसमें भंवर न हो
वह मौसम क्या जिसमें झंझावात न हो
वह बिजली क्या जिसमें कडकडाहट न हो
वह सपने क्या जिसमें उडान न हो
वह मंजिल क्या जो कठिन न हो
वह जीवन क्या जिसमें संघर्ष न हो

कंकरीली पथरीली राहों पर चलना है
हर राह को आसान बनाना है
कितनी भी मुश्किल हो डगर
कितना भी ऊंचा हो पहाड़
चढना तो तब भी है
नीचे बैठ दृश्य नहीं देखना है
तैरना न आए कोई बात नहीं
नदी में उतर जाइए 
हाथ पैर मार कर तो देखो
क्या पता किनारा मिल ही जाए
जो डरा वह कुछ नहीं कर पाया

Sunday, 25 October 2026

नवरात्र का संदेश

नव दुर्गा की उपासना
शक्ति की पूजा
यह है हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति
जहाँ नारी को नर से ऊपर का दर्जा दिया गया है
वह चाहे संपत्ति की देवी लक्ष्मी हो
विद्या की देवी सरस्वती हो
आसुरी शक्तियों का नाश करने वाली काली हो
भगवान भोलेनाथ की अर्धांगनी माता पार्वती हो
कहीं भी दोयम दर्जा नहीं है
फिर हमारे समाज की ऐसी सोच कैसे हो गई
औरत को हीन कैसे समझा जाने लगा
शास्त्रों में तो कहीं ऐसा उल्लेख नहीं है
एक से एक विदुषी नारियां हुई है
जानकी , द्रोपदी से लेकर लक्ष्मी बाई तक
ये विद्रोहणी नारियां भी हुई है
जिन्होने लीक से हटकर कदम उठाया

शायद पुरूषवादी मानसिकता को यह स्वीकार नहीं हुआ
तभी उसने दबाना शुरू किया
उसके अस्तित्व को नकारने लगा
जो कुछ है वह है
वह जैसे चाहेंगा वह होगा
धीरे-धीरे प्रक्रिया बढने लगी
और वह जो चाहता था वैसा होने लगा
औरत पैर की जूती बना दी गई 

आज फिर परिवर्तन हो रहा है
वह अधिकांश को पच नहीं रहा है
उनके अहम को ठेस लग रही है
वह दबाने की भरपूर कोशिश कर रहा है
सफल नहीं हो पा रहा है
तब अनर्गल तरीके अपना रहा है
सडी हुई मानसिकता से उबर नहीं पा रहा है
इसलिए समाज का संतुलन बिगड़ रहा है
जब तक वह शक्ति की शक्ति को पहचानेगा नहीं
उसकी अहमियत को स्वीकार नहीं करेंगा
तब उसका परिणाम भी उसे ही भोगना होगा
अंतः शक्ति की शक्ति को पहचाने
यही तो नवरात्र का संदेश है

Friday, 23 October 2026

बेटी के जन्म से पराएपन की गाथा

बेटी का वह घर नहीं होता जहाॅ वह जन्म लेती है 
उसको संवारती है , दुलारती है 
झाड़ू - पोछा करती है , सजाती है 
मां के साथ हर वक्त खड़ी रहती है 
सब्जी लाने से लेकर बिस्तर बिछाने की जिम्मेदारी 
खाना बनाने - खिलाने - समेटने और बर्तन साफ करना 
छोटे भाई- बहनों की देखभाल करना 
समय से पहले ही बड़ी हो जाती है 
कोई मान - मनुहार नहीं करती 
जो है उसी में काम चला लेती है 
पिता की हैसियत और मजबूरी दोनों को यह भलीभांति समझती है 
मेहमानों का स्वागत सत्कार से लेकर बैंक का काम सब कर लेती है 
अपने बासी खाना खा लेती है पर पिता - भाई को ताजा देती है 
उनकी थाली में कभी घी - दूध नहीं रहता 
कपड़े भी ऐसे - वैसे में चला लेती है 
तब भी कहीं जिक्र नहीं करती 
अपने परिवार की बुराई उन्हें नहीं भाती 
परिवार वालों के खिलाफ सुन नहीं सकती 
किसी से भी लड़ जाती हैं 
पढ़ाई में भी किताबें नहीं खरीदती , मांग कर चला लेती है 
जब घर की माली हालत अच्छी नहीं रहती तब भी वह गर्व से रहती है 
वह अपने को गार्जियन ही समझने लगती है 
अपने से छोटों पर धौंस जमाना ,उन पर नजर रखना 
जब तक वह रात को घर नहीं आ जाए जागते रहना 
टेलीविजन देखने पर , घूमने पर , देर रात नीचे खड़े होने पर टोकाटाकी 
दोस्तों के घर में बेवक्त बैठने पर नाराजगी 
हुक्म चलाती है भरपूर 
उसको यह भान ही नहीं रहता 
वह किस खेत की मूली है 
जब ब्याह हो जाता है वह पराई हो जाती है 
देखने का नजरिया  बदल जाता है 
उस घर के मामलो में वह बोल नहीं सकती 
चुपचाप रहें तो ठीक अन्यथा न जाने क्या-कुछ कहा जाता है 
जवाब न दें , गलत का प्रतिरोध न करें 
अगर उसकी हैसियत अच्छी न हो तब तो उसे तुच्छ देखा जाता है 
बार-बार उसे उसकी औकात याद दिलाई जाती है 
उस पर एहसान का एहसास हर पल कराया जाता है 
 उसे नजरअंदाज किया जाता है 
लालची करार दिया जाता है 
कंजूस कह मजाक उड़ाया जाता है 
स्वार्थी कहा जाता है 
जिस परिवार की मंगल कामना वह दिन - रात करती है उसी पर तोहमत लगाया जाता है वह जलती है सबसे 
जिस परिवार पर घमंड करती है 
बाहर बड़ाई मारती है 
वह सब दिखावा और ढोंग करती है ताकि उसकी इज्जत बनी रहें 
मायके और ससुराल पर ही वह निर्भर रहती है 
उसका अपना कुछ नहीं होता 
वह डरती रहती है कि कहीं मायके का कोई उससे रूठ न जाए 
कोई नहीं बुलाए तो भी वह जाती है 
कोई नहीं प्रेम और अपनेपन से बात करें तब भी 
वहाँ उसको कुछ बुरा नहीं लगता 
उस घर से जन्म का रिश्ता जो है 
उस घर के लोगों से भी 
वह कभी-कभार झगड़हिन का खिताब भी पा जाती है 
घर फोड़ने का भी 
घमंडी का भी भले ही उसके पास घमंड करने लायक कुछ भी बात नही 
जिन मां - बाप के लिए वह सब कुछ करने को तैयार रहती थी 
उनके प्रति गलत होते देख आवाज नहीं उठा सकती 
किसको टोक या बोल नहीं सकती 
मां - बाप भी चुप चुपचाप रहते हैं , उसे चुप कराते हैं 
मां - बाप का किया भी उसे ही सुनना पड़ता है 
भले ही वह उसमें सहभागी न हो 
यहाँ तक कि उसे उस बात का पता न हो 
गलती उसकी केवल वह कि वह उनके साथ हर वक्त- बेवक्त खड़ी थी 
उसको कोई  सम्मान नहीं 
वह न घर की सदस्य ही होती है और न मेहमान ही 
उसका स्वागत मन से कोई नहीं करता 
एक समय बाद तो कोई याद भी नहीं करता 
नई पीढ़ी तो इस नजरिए से देखती है जैसे डायनासोर आ गई हो 
वह छुप - छुप हंसती है और मजाक उड़ाती है 
उसकी छवि इस तरह से बना दी जाती है कि उसको लगता है कि वह सच में ऐसी ही है 
उसकी बात उसकी प्रतिक्रिया सब याद रहती है 
बरसों बाद भी सबके सामने मजाक बनती है 
बातें याद कर ठहाके लगाए जाते हैं
यहाँ तक कि उसके बच्चों के सामने भी मां का माखौल 
उसे नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं 
यह होती है 
बेटी के जन्म से बेटी के परायेपन की गाथा 
यह कथा अमूमन हर घर की 
बेटी , बहन , बुआ की सिलसिलेवार चलने वाली दास्तां 

हमने देखा है

हमने देखा है
पहाडों को झुकते हुए
हमने देखा है
चट्टानों को टूटते हुए
हमने देखा है
बरसात को रोते हुए
हमने देखा है
विशालकाय वृक्ष को ढहते हुए 
हमने देखा है
हरे - भरे जंगलों में आग लगते हुए 
हमने देखा है
सूर्य को अस्त होते हुए 
हमने देखा है 
चांद को बादलों में घिरते हुए 
हमने देखा है
तारों को टूटते हुए 
हमने देखा है
पपीहे को दो बूँद पानी के लिए तडपते
हमने देखा है
नदियों को सूखते हुए
हमने देखा है
उपजाऊ को बंजर होते
हमने देखा है
उडान भरते हुए धडाम से नीचे गिरना
हमने देखा है
शेर को सियार बनते
हमने देखा है
राजा को रंक बनते
हमने देखा है
करोड़पति को रोडपति बनते
हमने देखा है
शिक्षा को अपमानित होते
हमने देखा है
काबिलियत को तलवे चाटते 
हमने देखा है
हुनर और योग्यता को दरकिनार होते
हमने देखा है
भ्रष्टाचारी को ऊँचे सिंहासन पर विराजमान  होते
हमने देखा है
अच्छे - अच्छों को हाथ जोड़ते हुए 
हमने देखा है
जिंदगी को मजबूर होते
हमने देखा है
जीवन को बेरंग होते
हमने देखा है
असतित्व खत्म होते
बहुत कुछ दिखाती है यह जिंदगी 
बहुत कुछ सिखाती है यह जिंदगी

Thursday, 22 October 2026

शब्द

शब्द अपने आप में विस्तृत है
यह अर्थ है
यह कलह है
यह सांत्वना है
यह आज्ञा है
यह वजनी है
यह अक्षय है
यह निशब्द है
यह निराला है
इसमें तोड़ने और मोडने की शक्ति है
दूर और पास लाने की शक्ति है
यह वह जादूगर है
जो किसी को भी अपना बना सकता है
युद्ध करा सकता है
अलगाव करा सकता है
इसकी महिमा न्यारी
जिसने इसकी महत्ता समझ ली
वह कभी नहीं हार सकता
जब वाणी का जादू चलता है
तब बडे बडे भी वश में हो जाते हैं
यह सबसे बडा वरदान प्राप्त
वह भी केवल मानव को
हाँ उसको इससे खेलना आना चाहिए
तब तो उसकी जीत निश्चित है
आओ शब्दों से खेले
अंजानो को भी अपना बनाए

मासूम - मायूस जनता

किस्मत बंद हुई चुनाव के पिटारे में
साम ,दाम ,दंड ,भेद सारे नुस्ख़े आजमाए गए
अब पिटारा खुलने का इंतजार
जैसे ही पिटारा खुला
किस्मत चमकी
रातोरात ऐश्वर्य और संपत्ति का डेरा
जनता का क्या
हाथ जोड़ लिया
दो पेग पिला दिया
कुछ पैसे बांट दिया
कुछ रोटी का टुकड़ा फेंक दिया
कुछ बात बना दी
कुछ लंबी चौड़ी हांक दी
कुछ झूठ बोल दिया
कुछ झूठे वादे कर दिया
वह पिघल गई
झांसे में आ गई
वह जहाँ थी वही है
हम उसके बल पर बन बैठे शहंशाह
पहले हमने हाथ जोड़ा
अब वह जोड़ेंगे 
पहले हम घूमे गली कूचे
अब वह घूमेगी हमारे आस-पास
हमारे दर्शन भी दुर्लभ
हम रहेंगे सुरक्षा के घेरे में
वह रहेगी ताकती दूर से हमें
उसकी परवाह किसे
हमने तो अपना क्या अपने पूरे खानदान का वर्तमान एवं भविष्य दोनों को संवार दिया
जमीन से उठाकर आसमान पर बिठा दिया
चुनाव तो हो चुके 
जनता की ऐसी की तैसी
अब पांच साल जम कर राज करेंगे
अगले चुनाव तक फिर कोई चारा फेंक देगे
शगूफा छोड़ देंगे
फिर अपनी बातों में ले लेंगे
ऐसे ही हम राजा बने रहेंगे
और वह बेचारी हमारी मायूस - लाचार प्रजा

Tuesday, 20 October 2026

यह समाज ???

रावण ने सीता का हरण किया 
गलत था 
उसका कोई समर्थन नहीं 
सीता वहाँ सुरक्षित थी 
सीता के चरित्र पर कोई आंच नहीं आई
लंका में रहकर 
शत्रु के घर ससम्मान 
वापस भी लौटी 

यह समाज पीछे नहीं रहा 
उंगली यही उनके चरित्र पर उठी 
उनको अयोध्या से निष्कासित किया गया 
एक बार सास 
एक बार समाज 
एक बेटा एक राजा 
राम आदर्श 
सीता एक आदर्श पत्नी नहीं बन पाई 
यह वह समाज है 
जिसने माता सीता पर लांछन लगाने से नहीं चूका 
तो साधारण औरत की क्या बिसात है 

राम बन जाओ??

सब कहते हैं 
राम बन जाओ 
क्या करें 
अपना हक छोड़ दे 
संन्यास धारण कर ले
राम बन भी गए 
तो भरत कहाँ कोई बन पाएगा 
राम तभी बना जा सकता है 
जब भरत और लक्ष्मण भी हो 
यहाँ तो दुर्योधन का बोलबाला है 
नहीं तो नहीं 
सुई के नोक बराबर भी जमीन नहीं 
राम तभी बना जा सकता है 
जब रावण जैसा विद्वान और भक्त हो 
जिसने सीता का हरण तो किया 
अशोक वाटिका में ससम्मान रखा 
लंका में विभीषण भी थे 
मंदोदरी भी थी 
यहाँ तो सब धृतराष्ट्र बने हैं 
उनका साथ दे रहे हैं 
भीष्म,  विदुर और द्रोणाचार्य 
गलत को गलत नहीं कह सकते 
बलशाली होते हुए भी 
एक नारी का चीरहरण देखते रहें 
तब कैसे इस युग में कोई राम बने 
यहाँ तो कृष्ण जैसा बनना पड़ेगा 

Monday, 19 October 2026

आप अनमोल हो

अपने आप को कमतर समझना छोड़ दो 
किसी के लिए जिंदगी जान पर मत लगाओ 
तुम कल भी नायाब थे 
आज भी हो 
कल भी रहोगे 
उनसे पूछो 
जिनकी जिंदगी तुम हो 
जिनके जीने का मकसद हो 
जिनकी खुशी आपके इर्द-गिर्द घूमती हो 
दूसरों की बातों को तव्वजों न दें 
आप उनकी आँखों से देखो 
उनके मुख को देखो 
मत निराश हो 
जीवन बहुत अनमोल है 
उसे व्यर्थ न गंवाये 
जीकर तो देखिए 
मजा आ जाएगा 
क्या हुआ कभी ट्रेफिक में फंस गए 
कितने समय 
निकल ही जाओगे 
आपके साथ  
आपके आगे - पीछे न जाने कितने लोग होगे 
रास्ता खुल ही जाएगा 
ट्रेफिक पुलिस जो ऊपर वाला है 
वो आ जाएगा 
विश्वास रखें 
कुछ समय के लिए 
पौं पौं को सुन लें 
इधर-उधर का नजारा देख लें 
जब खुल जाए 
आगे रफ्तार से बढ़ लें 
कोई रोक ही नहीं पाएगा 

बेटा घी का लड्डू नहीं

घी का लड्डू गोल न हो टेढा ही सही
बेटा कैसा भी हो
काला नाटा मोटा
तब भी बेटा ही है
अनमोल है
तब बेटी क्यों नहीं ??
इन सबसे ज्यादा गुण मायने रखता है
रंग और बनावट नहीं
खूबसूरती को देखने का नजरिया होना चाहिए
बेटे के लिए तो कहा जाता है
राम और कृष्ण भी सांवले थे
बेटी से फिर वह अपेक्षा क्यों ??
वह नकुसा क्यों 
अनवान्टेड क्यों 
संतान तो संतान होती है
जैसी भी हो प्यारी होती है
उसको दोयम दर्जा क्यों ??
उसे एहसास होना चाहिए
वह अपने परिवार के लिए अनमोल है
उसका अस्तित्व महत्त्वपूर्ण है
लोगों की सोच कुछ भी हो
माता-पिता की सोच ऐसी न हो
उसे हेय न समझा जाए
अपने जिगर के टुकड़े को हीरा समझे 
कोयला नहीं
उसको चमकने का मौका दें
सांवले और कालापन के सोच की आग में जलने न दे
आत्मविश्वास से भरपूर ऐसा सशक्त व्यक्ति बनाएं
कि सारी खूबसूरती उसके सामने पानी भरे
दूर से देख ईर्ष्या करें
उसके जैसे बनने की कोशिश करें

Friday, 16 October 2026

जरा याद उन्हें भी कर लो

सबने राम को याद किया
रावण को याद किया
लंका विजय के भागीदार रहें 
उस युद्ध के सहयोगी  बंदर और भालू
वह कहीं गुम हो गए 
विभिषण,  कुम्भकर्ण,  मेघनाथ भी याद आए

यही तो होता है
सेहरा जीत का किसी एक के सर पर
और दूसरे गुमनामी में 
गांधी राष्ट्र पिता बनें 
उस स्वतन्त्रता की लडाई में 
न जाने कितने गुमनाम 
जिनका योगदान इतना कि
आजादी मिलती ही नहीं 
अगर वे न होते

सब भूल जाते हैं 
भूला दिए जाते हैं 
समाज हो
परिवार हो
राष्ट्र हो
कौन याद रखता है
इन नींव की ईटों को 
जिनके ऊपर यह बुलंद इमारत खडी है

Thursday, 15 October 2026

किताब से नाता जोड़ लो

पढना सीख लो
किताब से नाता जोड़ लो
यह वे नायाब साथी जिनका कोई नहीं सानी
बडे बडो को झुकना सिखा देती है यह
जिंदगी जीना सीखा देती है यह
बहूमूल्य होती है यह
सारे संसार को अपने में समेटती है यह
भूत ,भविष्य ,वर्तमान से अवगत कराती है यह
यह लेती नहीं देती है
ज्ञान बांटती है
लोगों को अमर कर देती है
सब कुछ अपने पन्नों में छिपा लेती है
दुख - दर्द ,भावना - संवेदना
यह सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखती है
यह ईश्वर की नहीं मानव की अमूल्य रचना है
लेखक ,कवि और इतिहासकारों की देन हैं
वेद ,दर्शन ,धर्म से विभूषित
जिंदगी जीना सिखाने वाली
इस अमूल्य सौगात को गले लगा लो
पढना सीख लो
किताबो से नाता जोड़ लो
तुमको यह फर्श से अर्श तक पहुंचा देगी
समाज में क्रांति लाने का दम रखती है
बडे बडे को पानी पिला सकती है
यह दिखती छोटी है
पर काम बडे बडे करती है
यह किताब है
यह जीवन है
यह विश्व है
आज इससे नाता जोड़ लो
कल यह तुमको सबसे जुडवा देगी
जीवन जीना सीखा देगी
तुम्हारी दुनिया बदल देगी
पढना सीख लो
किताब से नाता जोड़ लो

Sunday, 11 October 2026

हैपी नवरात्र

आज नवदुर्गा पधार रही है 
आज इंटरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे भी है 
अपने घर आई बेटी का स्वागत करें 
उसे सुरक्षा और सम्मान से जीने का हक दे 
उसको मजबूत बनाए ताकि वह हर परिस्थिति का मुकाबला कर सके 
हर लड़ाई लड़ सके 
हर बाधा को पार कर आगे बढ़े 
महिषासुर मर्दिनी बनने का माद्दा हो 
दुर्गा आपके घर में ही है 
आसपास ही है 
उसको जीने दीजिए 
माता जी खुश होकर आशीर्वाद देकर जाएंगी 
मां के नौ रुप है 
हर रूप अपने आप में  एक विशेष है 
हैपी नवरात्र 

Happy Beti Day

आज इन्टरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे
बेटियां हमारी सबसे प्यारी
सबसे उपेक्षित
आज भी भेदभाव
बेटा और बेटी में
समय बदल रहा है
सोच भी बदल रही है
पर वह कितनी ???
सरकार योजनाओं की घोषणा कर रही है
ताकि बेटी बोझ न लगे
उनको गर्भ में न मारा जाय
वहाँ से बची तो उपेक्षा न हो
वहाँ से बढी तो आगे दहेज की बलि वेदी पर न चढे
वहाँ से बची तो
सारी उम्र घुटते सहते न बीते
बेटी को आने दे
पढाई लिखाई करने दे
उसको बोझ न समझे
वह भी घर का चिराग है
बेटा और बेटी में भेदभाव न करै
वह तो घर की रौनक है
बेटी ,बहन ,पत्नी ,माँ ,बहू के रूप में
वह अहम हिस्सा है समाज का
उसको पंख फैलाने दे
उसकी योग्यता की कदर करें
आप उसे प्यार और सम्मान दे
वह आपकी जिंदगी को बदल देगी
उसके बिना तो समाज की कल्पना भी नहीं
वह बोझ नहीं अति महत्वपूर्ण है
जरा सोचिये
अगर बेटी ही न रही
तब तो कोई नहीं रहेगा
जननी है वह 
उसका सम्मान करेंगे
तभी समाज जिन्दा भी रहेगा
मजबूत और शक्तिशाली भी

Saturday, 10 October 2026

Evil dead

आज किसी महान अभिनेता की मृत्यु हुई 
सोशल मीडिया , टेलीविजन पर यह खबर दिन भर चलती रही 
और भी कुछ दिन चलेगी 
अखबार का पेज भरा रहा उनकी उपलब्धि पर 
प्रधानमंत्री से लेकर हर छोटे - बड़े नेताओं ने शोक संवेदना प्रकट की 
मुख्यमंत्री ने कांधा भी दिया 
ज्यादा संख्या में लोग उपस्थित रहें 
क्या नेता क्या अभिनेता क्या जनता सबने संवेदना दिखाई 
वे उम्दा कलाकार तो थे ही बहुत बेहतरीन इंसान भी थे 
समाज सेवा भी करते थे 
किसानों और गरीब के लिए बहुत कुछ किया 
उनकी आमदनी का बहुत सा हिस्सा चैरिटी में जाता था 
सादा जीवन जीते थे 
गांव से जुड़े थे 
घमंड और तामझाम से दूर 
अपनी मेहनत और संघर्ष से इस मुकाम पर पहुंचे थे 
स्पष्ट और निडर वक्ता थे 
यह सब गुण तो थे पर यह नहीं भूलना चाहिए 
वह एक व्यक्ति भी थे 
गुस्सैल थे 
पत्नी से निभी नहीं 
अलग रहते थे वर्षों से 
यह भी कोई अनोखी बात नहीं है 
पर विवाद के घेरे में रहें 
उन पर दोषारोपण हुआ था अपने ही साथ कई एक कलाकार से दुर्व्यवहार करने का 
उसने उस वक्त शुटिंग पर भी विरोध किया था यह सबको पता है 
कुछ समय बाद उसने केस भी किया हालांकि वह इल्जाम सिद्ध नहीं हुआ 
ME  TOO  का अभियान उसने छेड़ा था 
उस समय बहुत से उसके समर्थन में आए थे 
ऐसी महिलाएं जिनके साथ वर्षों पहले इससे गुजरना पड़ा था
और यह सही है 
समाज में यह घर से ही शुरुआत होती है 
परिवार में भी महिला सुरक्षित नहीं होती कभी-कभार 
सबके सामने घूंघट निकलवाने वाले बहू का ही उसके जेठ और ससुर द्वारा शारीरिक शोषण 
कार्य स्थल पर शोषण 
वह कमजोर पड़ जाती है आवाज नहीं उठाती 
उसको ही गलत मान लिया जाएगा इस भय से 
आज उसने कहा है 
Evil dead 
सबको बुरा लग रहा है 
मरे हुए के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए 
मृत्यु चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं है 
उसके ऊपर छींटाकसी की जा रही है 
कोई सच बात नहीं जानता 
जिसके साथ हुआ है वह ही जानता है 
यहाँ तो भगवान कहें जाने वाले महात्मा और संन्यासी का हाल लोगों ने देखा है 
अभी कुछ दिन पहले विश्व के बड़े - बड़े नेताओं का एक फाइल मे नाम आ चुका है 
तो निष्कर्ष निकालना बंद करें 
जो सबके लिए अच्छा हो वह
हर किसी के लिए अच्छा हो 
यह जरुरी नहीं है 
व्यक्तिगत कमजोरियां होती है 
धुआं भी वहीं उठता है जहाँ आग जली हो 

Friday, 9 October 2026

रोटी

मैं रोटी हूँ 
आप सब मुझसे अंजान नहीं 
हर जगह मेरी मांग है 
मुझे बनाना इतना आसान नहीं 
बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं 
पहले गूंथना 
फिर कटना लोई में 
फिर तवे पर चढ़ना 
दोनों तरफ सेंकना 
फिर फूलना 
तब जाकर थाली में आना 
उदर तृप्ति करना 
मेरा अलग अलग आकार 
कुछ भी मुझमें मिलाकर स्वादिष्ट बना लो 
ऐसा लगा रोटी 
मुझसे यह सब कह रही है 
जीवन भी तो ऐसा ही है 
खूब निचोड़ता है यह 
तब जाकर कहीं कुछ हासिल होता है 
सफलता केवल अपने लिए नहीं 
सबके लिए होती है 
परिवार खुशहाल हो जाता है 
हर किसी की आशा जुड़ी रहती है 
रोटी की तरह सींकना तो पड़ेगा 
तभी जीवन खुशियों से फूलेगा