Saturday, 18 June 2016

बेटी बचाओ

मातृशक्ति नहीं बचेगी तो इस दुनियॉ में बचेगा कौन???
प्रसव वेदना ,दुख- दर्द पीडा सहेगा कौन
मानव हो तो दानवता को त्यागो
उस नन्ही सी जान की रक्षा कर इंसान बनो तुम
यही मॉ है जो इस दुनियॉ में सबको लाई है
यही पत्नी है जो सहधर्मिणी तथा सुख- दुख की भागीदार है
यही कोख में पल रही बेटी है जो पिता कहलाने का सौभाग्य दिला रही नारी ही जननी है
उसकी ही कोख में संसार पला है
वही नहीं तो फिर कोई नहीं
न तुम न यह संसार
गर्भ में जिसकी हत्या हो रही है
वही जीवनदायिनी है
अपने ही हाथों से अपना विनाश मत करो    --- बेटी बचाओ

Friday, 17 June 2016

ऑसू - हर दम साथ निभाता

हम ऑसू है हर दम साथ निभाने वाला
जब कभी मन उदास हो ,छलक ही जाते हैं
खुशी हो तब भी भर आते हैं
अपनों की याद आए तब बह ही जाते हैं
छिपा कर लाख कोशिश हो तब भी
हम जी हल्का करने का साधन है
कोई भी साथ न हो पर मैं तो हमेशा पलकों पर ही रहता हूँ
अकेलेपन और तन्हाई का सहारा है
अपने जज्बात को बिना कहे समझाना मेरा काम
जहॉ शब्द नहीं वहॉ ऑसु काम कर देते हैं
मैं पवन नहीं जो उड जाउ.
मैं मौसम भी नहीं जो बदल जाउ
मैं वाष्प भी नहीं जो बादल बन जाउ
मैं बर्फ भी नहीं कि थोडी गर्मी से पिघल जाउ
मेरा तो कोई अंत नहीं
हर घडी साथ निभाता
सुख- दुख मे, जीवन - मरण में
जन्म के साथ ही आता हूँ
समाप्त होने तक रहता हूँ
कभी अकेला नहीं छोडता
मैं तुम्हारा साथी ऑसू जो हूँ

दिल है कि मानता नहीं - पर उपदेश कुशल बहुतेरे

दूसरे को उपदेश देना बहुत आसान है पर अमल करना मुश्किल
कुछ लोगों के पास आपकी हर समस्या का समाधान रहता है
चाहे वह खाने से लेकर डॉक्टर हो या
पढाई से लेकर पोशाक हो
हर क्षेत्र में माहिर
ऐसा करो तो ऐसा नहीं करो
पर असल में मदद करने वाले कम ही होते हैं
बात करने और बडाई मारने में क्या जाता है
सामने वाला तो जैसे कोई अलग दुनिया से आया है
उसे कुछ मालूम नहीं है
हर जगह ऐसे शख्स मिल जाएगे
न मॉगने पर भी मुफ्त में सलाह देने को राजी
अगर मना कर दें तो जवाब
हमारा क्या,हम तो आपके भले के लिए ही बता रहे थे
कौन समझाए कि हर दिन आपकी सलाह सुनते - सुनते हम थक गए है
अपनी सलाह हम पर मत थोपे
पर ये तो बाज नहीं आएगे अपनी आदतों से
इनका दिल है कि मानता नहीं

Thursday, 16 June 2016

पैसा सबकी जरूरत - फिजूल में न उडाए

हमारे पडोस में एक दंपत्ति रहते हैं ,बाल - बच्चे नहीं है
दोनों कामकाजी है
उनके घर कोई नौकर नहीं है ,अपना काम स्वयं करते हैं  आजकल नौकर. रखना भी अमीरी की निशानी है
एक दिन बिल्डिंग का चौकीदार किसी से बोल रहा था  क्या करेंगे पैसा जमा कर
कोई खानेवाला भी तो नहीं है
पर यह सोच कर पैसे को बिना कारण फिजूलखर्च किया जाय ,यह तो उचित नहीं है
पता नहीं जिंदगी कितनी बडी है
बुढापे में तो और जरूरत होती है जब शरीर कमजोर हो जाता है
दवाई में पैसे खर्च होते हैं.
एक बार अस्पताल में एडमिट हुए तो हजारो- लाखो रूपए लग जाते हैं
जिसने यह नहीं सोचा और भविष्य की योजना न बनाई तो  जीना दूभर हो जाएगा
आज तो बच्चे बडे होने पर मॉ- बाप को वैसे ही नहीं पूछते हैं तो आपके पास कुछ नहीं होगा तो कौन देखभाल करेंगा
पैसा कम से कम आपकी जिंदगी को आसान तो बना देगा
पैसा सब कुछ नहीं पर बहुत कुछ मायने रखता है
इसलिए सोच - समझ कर खर्च करना चाहिए
जितनी चादर हो उतना ही पैर फैलाएं
भविष्य के लिए बचत करें