Saturday, 22 June 2024

न पूछना किसी की कमाई

वे घर आए हमारे 
हम खुश हुए 
आव भगत की 
अतिथि धर्म है 
घर में आए का स्वागत 
पैसे वाले हैं 
बात करते-करते पूछ बैठे 
कितनी आमदनी है
क्या करोगे पैसे का 
यह वह शख्स है जो 
पैसे वाला है 
संपत्ति शाली है
हम तो बस जोड़ जोड़ गृहस्थी चलाने वाले 

अब क्या कहें इनसे 
अतिथि जो थे 
कुछ कह देंगे तो बुरा मान जाएंगे 
पर कहना था 
यह पहली बार नहीं था 
पूछा उनसे 
आप बताओ क्या करोगे 
इतना पैसा है उसका 
पैदायशी अमीर 
तब इधर-उधर की बातें करने लगे 

लोगों की आदत होती है
दूसरों की कमाई पूछने की 
भले अपने पैसों में खेल रहे हो
नीचा दिखाना है या ताना है 
यह समझ नहीं आता 
अपनी छोड़ दूसरों की पड़ी 
पैसे से तौलते हैं लोगों को 
भले एक धेला खर्च न करें किसी पर 
किसी के घर जाएं तो भी खाली हाथ 
अरे आप गए हैं मिलने 
प्यार और अपने पन का आदान-प्रदान करने 
अगर आप से बात की है 
सुख - दुख की बात करें 
मत कुछ करें सुन ही ले 
घाव पर नमक न छिड़के 
अपनी हैसियत को मत दिखाएं 
कहा गया है ना 
किसी से उसकी उम्र और कमाई नहीं पूछनी न बतानी 
प्रेम से बतियाएं और दिल में जगह बनाएं 

मजबूत बनना है मजबूर नहीं

हमने चलना शुरू ही किया था
लोगों ने रोकना शुरू कर दिया 
राह में रोड़े अटकाने लगे
रास्ता भी रोकने लगे 
हमने रास्ता बदल लिया 
चलना नहीं छोड़ा 
चलते रहे चलते रहे
हर राह की बाधा पार करते रहें 
यह सब सीखा है हमने प्रकृति माँ  से 
पतझड़ तो आते ही है 
लेकिन वह जीना नहीं छोड़ती 
हंसती - मुस्कराती रहती है
डोलती रहती है
झूमती रहती है
उसे पता है
वसंत भी आएगा 
यह वक्त भी बदलेगा 
यह एक जैसा नहीं रहता 
आज हरा - भरा कल झड़ा 
तब भी तनकर खड़ा रहा 
धूप की भट्टी में तपता रहा
ऑधी- तूफान को झेलता रहा
शीत में ठिठुरता रहा 
नहीं तब भी घबराया 
उसको पता है 
सूरज निकलेगा और अस्त भी होगा
अगले दिन फिर आएगा जोश से 
अंधेरा दूर जो करना है 
आना - जाना तो लगना ही है
जब तक जीवन है तब तक थपेडों सहना ही है 
मजबूत बनना है मजबूर नहीं 

Wednesday, 19 June 2024

जाने दो

बच्चे विदेश जा रहे हैं 
बच्चे दूसरे शहर में जा रहे हैं 
अरे जाने दो 
उनको उड़ान भरना है 
अपने सपने पूरे करने है
आपके सपने भी उसमें शामिल हैं 
क्या इसलिए पंख दिए थे
जाना तो सबको है
एक न एक दिन
इसलिए किसी को जकड़ कर रखना है
प्यार का वास्ता देकर 
पुराने पत्ते गिरते हैं 
नए पत्ते आते हैं 
कोई जीव का बच्चा साथ नहीं रहता 
सब साथ छोड़ जाते हैं 
फिर मनुष्य अपवाद क्यों 
सबसे अक्लमंद प्राणी 
आना - जाना है
प्रकृति का यही खेला है 
कोई इससे नहीं अछूता 

मैं चल रहा हूँ

मैं बैठा रहा 
सोचता रहा
सपने बुनते रहा 
यह करूगा वह करूंगा 
ख्वाब तो बुने बड़े बड़े 
उठा नहीं चला नहीं 
यहीं मैं चूक गया 
सोचा था कुछ 
सोच रहा हूँ कुछ 
अब क्या 
कुछ नहीं 
यह तो होना ही है 
अब उठ खड़ा हुआ हूँ 
चलना भी है
दौड़ना भी है
गिरने का डर नहीं 
उठने की चाह 
सपने भी साकार 
आज नहीं तो कल
हम चल पडे हैं 
वक्त भी चल रहा साथ 
मंजिल दूर नहीं 
देख रहा हूँ यहीं से 
बस पहुँच रहा हूँ 
मैं चल रहा हूँ।