Friday, 31 July 2026

मौसम का मिजाज बदलता है

कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है 
अब धरती माता तप नहीं रही है 
गर्मी से जूझ रहे लोग भी आनंदित हुए 
रात में ऑख खुली 
थोड़ा ठंड महसूस हुई 
चादर जो कितने महीनों से ऐसे ही सिरहाने पड़ा था 
उसको खोल ओढ़ लिया 
मन को सुकून मिला 
इस वर्ष की बेहिसाब गर्मी से बेहाल हो गई थी 
सहन नहीं हो रहा था 
पर क्या करें 
मौसम का मिजाज है 
रात में नींद खुलने पर जल्दी फिर नहीं आती 
विचार उमड़ते - घुमड़ते रहते हैं 
ठंड अच्छी लग रही थी 
गर्मी की तपन भूल गई 
ऐसा ही जीवन है शायद 
कभी बहुत परेशान हो जाते हैं 
कुछ वक्त के बाद वह समय भी निकल जाता है 
तब इतनी याद नहीं रहती 
सुख - दुख आनी - जानी है 
वक्त बदलता रहता है 
ठंड,  गर्म , वर्षा , अंधड़ आते रहते हैं 
चले भी जाते हैं 
उनको जाना ही है 
टिक कर रह नहीं सकते 

Thursday, 30 July 2026

यह जन्मसिद्ध अधिकार है ???

युवा पीढ़ी अपने बड़ों का आईना होती है 
उसमें जो और जैसा संस्कार डाला गया है 
वो वैसे ही होंगे 
वे आपका प्रतिबिंब हैं 
आज उनके गाली-गलौज पर उंगली उठाई जा रही है 
सीखा कहाँ से हैं उन्होंने 
कहने को तो हम सभ्य समाज से आते हैं लेकिन 
मुख पर मां - बहन - बेटी की गाली तैयार रहती है 
कुछ तो बिना बात ही गाली निकालते रहते हैं 
शहरी परिवेश में तो कुछ मर्यादा भी है 
ग्रामीण अंचल में यह सामान्य बात है 
वहाँ तो बच्चा गाली देता है तो औरतें भी हंसती हैं 
जैसे बहुत अच्छा सीख रहा हो 
स्वयं ही गंदी और भद्दी बात बतियाती रहती है 
हद की अश्लीलता 
जबान पर कोई लगाम नहीं 
शादी-ब्याह में सुनिए 
सर शर्म से झुक जाएगा 
थोड़ा-बहुत परिवर्तन आ रहा है अब
लेकिन माहौल वैसा ही 
बस अड्डे पर
दुकानों पर 
सड़क पर
अश्लील गाने बजते रहते हैं 
लोग चलते रहते हैं 
छेड़ते रहते हैं 
फब्तियां कसते रहते हैं 
और इसमें कुछ बुराई भी नहीं है 
यह जन्मसिद्ध अधिकार है 


जेन जी को जोश में होश नहीं खोना है

अपनी आवाज उठाना 
अपनी मांगे रखना 
विरोध करना 
ये प्रजातंत्र में सबका हक है 
हां मर्यादित आचरण जरूर हो 
गाली - गलौज यह ठीक नहीं है 
वह भी अपने प्रधानमंत्री के लिए 
देश के मुखिया हैं वे 
उम्र दराज भी हैं 
इस नाते भी आदरोचित संबोधन होना चाहिए 
किसी की मां के लिए अपशब्द 
पुलिस कर्मियों से मारपीट 
तोड़ - फोड़ , उपद्रव 
यह भी तो उचित नहीं है 
जेन जी को अभी बहुत कुछ करना है 
क्रांति के जनक हैं वे 
उसका एक तरीका भी हो 
मोहनदास करमचंद गांधी से अच्छा उदाहरण कौन हो सकता है 
हिंसा - गाली-गलौज यह क्या है ??
उग्रता ठीक है और स्वाभाविक भी है 
होता है 
नौजवान हैं जोश है 
जोश में होश नहीं खोना है 

कौन सा रंग

जिंदगी में कभी - कभी परेशानी आती है एक साथ 
मन व्यथित हो जाता है 
ये क्या हो रहा है मेरे साथ 
कब तक 
क्या ऐसा ही चलता रहेगा 
ऐसा बिल्कुल नहीं होता 
पीछे मुड़कर देखने पर लगता है 
और हंसी आती है 
यह भी बीत गया 
कैसे इतना झेल लिया 
यहाँ हर तस्वीर कोरी ही मिलती है 
रंग भरना हमको है 
कौन सा रंग किस तरह 
किसे कितनी जगह देनी है 
एक ही रंग या रंग बिरंगी इन्द्रधनुषी 
सत रंगों से 
जीवन में हर रंग समाया 
हम चित्रकार हैं
निर्भर हम पर करता है 
कौन सा रंग भरें 
कैसे भरें