Thursday, 30 July 2026

यह जन्मसिद्ध अधिकार है ???

युवा पीढ़ी अपने बड़ों का आईना होती है 
उसमें जो और जैसा संस्कार डाला गया है 
वो वैसे ही होंगे 
वे आपका प्रतिबिंब हैं 
आज उनके गाली-गलौज पर उंगली उठाई जा रही है 
सीखा कहाँ से हैं उन्होंने 
कहने को तो हम सभ्य समाज से आते हैं लेकिन 
मुख पर मां - बहन - बेटी की गाली तैयार रहती है 
कुछ तो बिना बात ही गाली निकालते रहते हैं 
शहरी परिवेश में तो कुछ मर्यादा भी है 
ग्रामीण अंचल में यह सामान्य बात है 
वहाँ तो बच्चा गाली देता है तो औरतें भी हंसती हैं 
जैसे बहुत अच्छा सीख रहा हो 
स्वयं ही गंदी और भद्दी बात बतियाती रहती है 
हद की अश्लीलता 
जबान पर कोई लगाम नहीं 
शादी-ब्याह में सुनिए 
सर शर्म से झुक जाएगा 
थोड़ा-बहुत परिवर्तन आ रहा है अब
लेकिन माहौल वैसा ही 
बस अड्डे पर
दुकानों पर 
सड़क पर
अश्लील गाने बजते रहते हैं 
लोग चलते रहते हैं 
छेड़ते रहते हैं 
फब्तियां कसते रहते हैं 
और इसमें कुछ बुराई भी नहीं है 
यह जन्मसिद्ध अधिकार है 


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