Friday, 28 August 2026

सृष्टि का निर्माण अनवरत

पेड़ वही रह जाते हैं 
पंछी उड़ जाते हैं 
आंधी-तूफान का सामना करता 
धूप की तपन सहता 
फिर भी तन कर रहता खड़ा 
फल देता 
फूल देता 
छांव देता 
आश्रय देता 
तब भी उसे छोड़कर जाना ही है 
वह कुछ नहीं कर पाता 
बस देखता रह जाता है 
अब वह भी पहले जैसा नहीं रहा 
सूख रहा है 
उम्र हो रही है 
ठूंठ बन रहा है 
एक दिन वह कट जाएगा 
सब उसे लाद ले जाएंगे 
जला देगे 
राख बन जाएगा 
मिट्टी में मिल जाएगा 
जहाँ जन्म वहीं अंत 
यही सृष्टि का क्रम 
वहाँ फिर नया सृजन 
पहले वाला सब भूला दिया जाएगा 
नयी शुरूआत 
नया जीवन 
एक अध्याय बंद दूसरा शुरू 
रुकेगा कुछ भी नहीं 
किसी के लिए भी नहीं 

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