कोई न हो उदास
तुम भी खुश
हम भी खुश
यह इतना आसान नहीं
खुश रहना और रहने देना
बड़ा ही मुश्किल
भूल जाता है व्यक्ति
जहाँ दुख - परेशानी
समस्या तो वहीं
सारा समाज जब समानता पर हो
किसी के साथ भेदभाव न हो
जाति - धर्म- पैसा - ज्ञान
इन पर किसी प्रकार दवाब न हो
सबको जीने का हक हो
स्वतंत्रता हो
अनुशासन हो
मानवता हो
किसी से तुलना न हो
ऐसी समाज की रचना हो
वहाँ अपराध कैसे पनपेगा??
न किसी पर दवाब
सबको मिले रोजगार
खत्म हो भ्रष्टाचार
सबको जीने का अधिकार
यही तो चाहती है यह जनता
तुमसे सरकार
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