Saturday, 22 August 2026

देखना है होता क्या है

दो तिनके नदी में बहते जा रहे थे 
नदी का प्रवाह तेज था 
एक तिनका नदी की धारा के साथ ही बह रहा था 
उसने सोच लिया था 
जहाँ ले जाएगी चला जाऊंगा 
अपने को भाग्य भरोसे छोड़ दिया 
दूसरा तिनका यह मानने को तैयार नहीं था 
जद्दोजहद कर रहा था 
लड़ रहा था 
कोशिश कर रहा था 
वह नदी की धारा के अनुसार बहने को तैयार नहीं 
अब तो दोनों का दृष्टिकोण अलग- अलग 
कौन सही कौन गलत ???
यह भी तो नहीं कहा जा सकता 
एक जा रहा है जहाँ उसको ले जाया जा रहा है 
वह संघर्ष भी नहीं करना चाहता 
न विरोध भी करना चाहता 
दूसरे को यह स्वीकार नहीं 
किसका क्या हश्र होगा 
कौन कहाँ जाएगा 
क्या हासिल होगा 

एक बूंद की आपबीती 
जो ऊपर से तो गिरती है 
कहाँ जाएगी वह यह नहीं जानती 
सीप का मोती बनेगी 
किसी की प्यास बुझाएगी 
समंदर में मिल अपने को खारा करेंगी 
नदी - कुएं में मिल मीठा जल बनेगी 
खेतों को सींचेगी 
पेड़ - पौधों को लहलहाएंगी 
गंदी नाली में गिरेगी 
अब तो वह बादलों को छोड़ निकल चुकी है 
जो होगा वह देखा जाएगा 
उसे बादलों की बंदिश स्वीकार नहीं 
चल पड़ी है 
देखना है होता क्या है 

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