Saturday, 22 August 2026

जीवन का फंडा

घर से निकली 
अचानक बारिश होने लगी 
आज छाता घर पर ही छोड़कर आई थी 
पछतावा होने लगा 
अचानक मन में ख्याल आया 
बारिश को क्या मैं रोक सकती हूँ 
अपनी इच्छानुसार चला सकती हूँ 
उत्तर मिला   नहीं 
छाता तो ओढ़ सकती हूँ 
कुछ हद तक तो अपने को बचा सकती हूँ 
शायद जीवन भी ऐसा ही है 
परिस्थिति पर तो हमारा नियंत्रण नहीं है 
पर उसका मुकाबला तो हमें करना ही है 
कुछ न कुछ तो बचाव करना है 
पूर्ण रूप से तो नहीं कुछ हद तक ही सही 
मुसीबत जब आए
प्रयास नहीं छोड़ सकते 
बचाव रूपी छाता तो तानना ही चाहिए 
सब कुछ भाग्य और परिस्थिति पर नहीं छोड़ना 
यह बारिश भी हमेशा की नहीं है 
आई है तो जाएंगी भी 
मौसम बदलते हैं 
समय बदलता है 
एक सा कुछ भी नहीं रहता 
आज कुछ तो कल कुछ 
यही है जीवन का फंडा 

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