प्रेम न बांटा जा सकता है न खरीदा
समय-समय पर प्रेम में बदलाव हो जाता है
क्या प्रेम सचमुच बदलता है ??
आज सुनीता - गोविंदा के चर्चे सब जगह
चालीस साल का वैवाहिक जीवन खतरे में
धज्जियाँ उड़ाई जा रही है सुनीता द्वारा
असलियत तो कोई नहीं जानता
जो औरत दो बड़े बच्चों की माँ
पूरा जीवन परिवार के लिए समर्पित
आज वह क्यों ऐसा कर रही है
कहीं न कहीं कुछ बात तो है
अच्छा अभिनेता अच्छा पति हो
यह जरूरी तो नहीं
वे शालीनता से बोल रहे हैं
जिसका मन टूटा हो वो कैसे बोलेगी
उसकी भाषा बंबईया जरूर है
बिना लाग - लपेट के
पर भाषा से किसी को परखना
जया भादुड़ी इसका सबसे अच्छा उदाहरण
अमिताभ और रेखा के प्रेम के चर्चे
उस औरत ने कैसे झेला होगा और झेल रही है
उसका चिड़चिड़ापन सबको दिखाई देता है
कारण नहीं
अभिनेता जाना - माना पर पति
यहाँ तक कि लोग बोलते हैं
जया अमिताभ के लायक नहीं है
बहुत मगरूर है
रेखा से शादी नहीं करने दी
उसकी जिंदगी खराब की
अरे यह कौन सी बात हुई
कौन पत्नी यह स्वीकार करेंगी
यह भी याद रहें कि यह प्रेम विवाह था
उस समय जब जया शीर्ष पर थी
अमिताभ फ्लाप हो रहे थे
घर - बच्चों के कारण काम छोड़ा
भादुड़ी से बच्चन बनी
अपने को पूर्ण समर्पित किया
और आज वह विलेन बन गई
राधा का नाम कृष्ण के साथ
पूजा भी जाता है
रूक्मणि ने क्या अपराध किया था
यही तो वह समाज है
कब किसको उठाए और किसको गिराए
ऊपर से दोषी केवल औरत ??
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