Tuesday, 4 August 2026

क्या बात हुई??

मैं जा रही थी 
तुमने मुझे जाने के लिए नहीं कहा था 
मैं स्वयं गई 
तुमने मुझे रूकने के लिए भी तो नहीं कहा 
पूछा भी तो नहीं 
क्यों जाना है 
क्या हुआ 
कुछ नहीं बात
कोई नहीं प्रतिक्रिया 
घर तुम्हारा था 
गलतफहमी मेरी थी 
मैंने उसे अपना माना था 
किसी और के चीज को अपना मानना 
यह तो सरासर बेवकूफी है 
हो सकता है 
तुम चाहते हो कि मैं चली जाऊ 
संकोच वश कभी बोल नहीं पाए 
इधर-उधर की बात होती रही 
मुद्दों पर बात हुई नहीं 
हंसी - मजाक में टाल दिया गया 
हर बार मजाक नहीं भाता 
जिंदगी भी मजाक करती है तब 
तब सब कुछ खत्म कर देती है 
हंसना नहीं आता 
वह ऐसा झटका देती है कि चारो खाने चित्त 
कुछ नहीं सूझता है 
सब प्लान धरा का धरा रह जाता है 
तब न तुम कुछ कह पाते हो 
न मैं कुछ कह सकती 
बस सोचते रह गए 
क्या बात हुई  ???

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