सबको तो मरना ही है एक दिन
फिर क्या फर्क पड़ता है
क्यों मरे
कभी कोचिंग क्लास में आग लगने के कारण
कभी गेस्ट हाउस के ढहढहाकर गिरने के कारण
कभी बेरोजगारी के कारण
कभी रैंगिग के कारण
कभी गढ्ढे में गिरने के कारण कंस्ट्रक्शन साइट पर
कभी फेल होने पर
कभी अंक कम आने पर
कभी एडमिशन न मिलने पर
कभी किसी दूसरे की बेपरवाही से एक्सीडेंट
और भी कारण है
यह हमारा युवा वर्ग है
देश का भविष्य
किस राह पर
समझ नहीं पाए रहा
उपरोक्त कारण के जिम्मेदार कौन ??
सरकार - प्रशासन??
मरने दो
पहले ही मर गये ???
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