Saturday, 29 August 2026

चांद मुझे लगता प्यारा

आज रात को चांद देखा 
पूर्णिमा का चांद 
पूर्ण रूप से गोलाकार 
दुधिया प्रकाश बिखेरता 
बड़ा ही खूबसूरत 
सारी धरती उसकी शीतल चांदनी में नहाई हुई 
क्या यह हमेशा ऐसा ही रहेगा 
नहीं ना 
घटता - बढ़ता रहता है 
इस पर भी अमावस की छाया पड़ती है 
कभी-कभार बादल भी ढक लेते हैं 
इसमें भी दाग है 
तब भी तो हमने उसे स्वीकार किया 
प्यार- सम्मान दिया 
पूजते हैं सब
उसकी प्रतीक्षा रहती है 
उसकी बाट जोहते हैं 
उसके तारों को भी प्यार करते हैं 
यही तो है 
हमारा और उसका रिश्ता 
हम उसको बदलने की कोशिश नहीं करते 
जो भी है जैसा भी है 
हमें तो प्यारा है 
तभी तो यह नाता सदियों से टिका है 
हम यह बात रिश्तों में क्यों नहीं स्वीकार करते 
बस कमियां देखते हैं 
अगर चंद्रमा को हमने स्वीकार किया 
तब अपनों को क्यों नही 
प्यार करें और प्यार पाए 
बदले न 
ना बदलने की कोशिश करें 

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