Friday, 18 September 2026

अंदर - बाहर

बाहर कितना कुछ बदला 
लोग बदले 
परिस्थिति बदले 
अंदर कितना बदला 

बाहर सब दिखावा है 
एक तरह का छलावा है 
अंदर का अंदर रह जाता है 
बाहर कभी आ ही नहीं पाता 
बंधनों में बंधा 
यह अंदर - बाहर 
कभी एक सा हो नहीं पाता 
एक - दूसरे से मिल नहीं पाता 

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