मजूरी करना मानो गुलामी करना था
पेट के कारण गालियां सुननी पड़ती थी
मारा - पीटा जाता था
गुलामी का दौर खत्म हुआ
भूखमरी का भी अंत
अब मजबरी - काम नहीं करें
तब भी जीवनयापन हो जा रहा है
मुफ्त में अनाज मिल रहा है
पैसे भी मिल रहे हैं जो नशा- पानी के लिए पर्याप्त है
समय- समय पर बिजली बिल भी माफ
चुनाव आने पर कर्ज भी माफ
अब तो मजे ही मजे हैं
संविधान ने हमें अधिकार भी दिया है
दवाई भी मुफ्त अस्पताल भी
तीर्थ यात्रा भी भगवान के दर्शन भी
और क्या चाहिए
सही है
अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम
दास मलूका कह गए सबके दाता राम
यहाँ सबके दाता सरकार है
पूँजीपति अमीर हो रहे हैं
कुछ यहाँ पांच किलो पर खुश हैं
पढ़ने की क्या जरूरत
पकड तल कर कमा लेंगे
ठगी कर कमा लेंगे
लेकिन घूमेंगे आलिशान गाड़ी में
बड़े - बड़े बंगले बनाएंगे
भले ही चंदा चोरी करना पड़े
हमको अपनी पड़ी है
लोग जाए भाड़ में
नेताओ का एक ही नारा
तुम भी खुश रहो
हम भी खुश रहेंगे
हमको जीताओ हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे
वादा है तुम भूखे नहीं रहोगे
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