Thursday, 23 July 2026

वह किताबों की दुनिया

आज आलमारी साफ कर रही थी 
बहुत सी पुरानी चीजें निकाल कर फेंक रही थी 
कुछ पुराने अखबार के पन्ने 
कुछ कतरने 
कुछ पत्रिकाऍ  
जो पुरानी और पीली पड़ गई थी 
एक किताब मिली 
जो मैंने संभाल कर  रखी थी 
पहले तो न जाने कितनी बार पढ़ी थी 
बीच के वर्षों में भूल गई थी 
आज फिर वह जमाना याद आ गया 
किताब तो पुरानी हो गई थी 
उसका महत्व??
वह तो आज भी बरकरार है 
तभी तो पुरानी स्मृतियाँ ताजा हो उठी 
जीवन उतना पीछे चला गया 
जब हम रात भर जागकर इसे खत्म कर ही चैन लेते थे 
जब भी मन में उलझन होती 
इसके पात्रों से तुलना कर लेते थे 
प्रेरणा प्राप्त होती थी 
यही तो जीवन है शायद 
उम्र बढ़ने से महत्ता खत्म नहीं होती 
हम ऐसे - वैसे नहीं हैं 
जीवन में हर संघर्ष का सामना किया 
हारे नहीं 
मुश्किल और असफल होने पर फिर खड़े हुए 
आज कुछ बहुत याद आए 
प्रेमचंद,  शरतचंद्र,  शिवानी , मन्नू भंडारी , महादेवी वर्मा 
अज्ञेय , पंत , प्रसाद , निराला और न जाने कितने 
किताबों से नाता था हमारा 
उन पीढ़ियों से पूछो 
आज शायद मोबाइल और इंटरनेट पर सब झटपट उपलब्ध 
कहीं सहेजना नहीं 
जब चाहे तब हाजिर 
पर जनाब 
वह मजा मोबाइल में कहाँ जो किताबों में थी 

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