सावन आ रहा है
त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है
आनंद ही आनंद
हंसी आ गई
आनंद हो या न हो
हम इन्हीं के बहाने आनंदित होने की कोशिश करते रहते हैं
नहीं तो किस बहाने ??
लगता है
हम जिंदगी को धता बता रहे हैं
कह रहे हैं
तू कितना भी झूला झुला ले
हिचकोले खिलवा ले
हम भी हार मानने वालों में नहीं
चढ़ाव - उतार तो आते रहेंगे
हम भी झूलते - झूलते
जीवन नैया पार ही लगा लेंगे
डर के मारे झूले से उतरने वाले नहीं
यह वादा रहा
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