Friday, 18 September 2026

यह रह गया - वह रह गया

वैसे जीवन में बहुत ज्यादा महत्वकांक्षा कभी रही नहीं 
जो मिला जैसा मिला बस उसी में संतोष कर लिया 
ऐसा नहीं था कि आसपास ऐसे लोग नहीं थे 
सहकर्मीं नहीं थे दोस्त नहीं थे 
पर पता नहीं स्वभाव ही ऐसा था 
किसी चीज ने आकर्षित नहीं किया 
न सजने संवरने का शौक 
न मंहगे - कपड़ो- गहनों का शौक 
न गाड़ी - बंगले का शौक 
न मंहगे होटल में खाना और घूमने का शौक
एक अदद साधारण सी जिंदगी जी मैंने 
शायद परवरिश भी उसी तरह हुई 
हाॅ कभी पीछे मुड़कर देखती हूँ 
तब कहीं न कहीं कुछ छूटा सा लगता है 
जो उस समय नहीं लगा 
बच्चों को भी उसी हिसाब से ढाला 
ऐसा नहीं था कि कंगाली थी 
शौकीन लोग कर्ज लेकर भी शौक पूरा करते हैं 
मैं पता नहीं किस मिट्टी की बनी हुई 
कभी-कभार वैसे अवसर भी मिले 
पर मैंने उसका लाभ नहीं उठाया 
आज जब सब है 
तब न वह उम्र बची है न वैसी शक्ति
शौक जरूर रखे 
उसे पूरा भी करें 
ज्यादा नहीं सीमा में 
अपने बच्चों की इच्छाओं को भी मारे नहीं 
उनको सब भरपूर अपनी सामर्थ्य नुसार देने का प्रयास करें 
ताकि जब अतीत को देखे तो आपको मलाल न हो 
अरे यह रह गया 
वह रह गया 

No comments:

Post a Comment